Sad Poetry (page 339)
याद कर के और भी तकलीफ़ होती थी 'अदीम'
अदीम हाशमी
वो जो तर्क-ए-रब्त का अहद था कहीं टूटने तो नहीं लगा
अदीम हाशमी
सदाएँ एक सी यकसानियत में डूब जाती हैं
अदीम हाशमी
जो मह ओ साल गुज़ारे हैं बिछड़ कर हम ने
अदीम हाशमी
उसी एक फ़र्द के वास्ते मिरे दिल में दर्द है किस लिए
अदीम हाशमी
तेरे लिए चले थे हम तेरे लिए ठहर गए
अदीम हाशमी
तमाम उम्र की तन्हाई की सज़ा दे कर
अदीम हाशमी
शामिल था ये सितम भी किसी के निसाब में
अदीम हाशमी
सर-ए-सहरा मुसाफ़िर को सितारा याद रहता है
अदीम हाशमी
रख़्त-ए-सफ़र यूँही तो न बेकार ले चलो
अदीम हाशमी
मुफ़ाहमत न सिखा जब्र-ए-नारवा से मुझे
अदीम हाशमी
मेरे रस्ते में भी अश्जार उगाया कीजे
अदीम हाशमी
मैं गुफ़्तुगू हूँ कि तहरीर के जहान में हूँ
अदीम हाशमी
लोगों के दर्द अपनी पशेमानियाँ मिलीं
अदीम हाशमी
क्यूँ मिरे लब पे वफ़ाओं का सवाल आ जाए
अदीम हाशमी
कुछ हिज्र के मौसम ने सताया नहीं इतना
अदीम हाशमी
कोई पत्थर कोई गुहर क्यूँ है
अदीम हाशमी
किसी झूटी वफ़ा से दिल को बहलाना नहीं आता
अदीम हाशमी
किस हवाले से मुझे किस का पता याद आया
अदीम हाशमी
हम बहर-ए-हाल दिल ओ जाँ से तुम्हारे होते
अदीम हाशमी
ग़म के हर इक रंग से मुझ को शनासा कर गया
अदीम हाशमी
ग़म है वहीं प ग़म का सहारा गुज़र गया
अदीम हाशमी
फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था
अदीम हाशमी
इक पल बग़ैर देखे उसे क्या गुज़र गया
अदीम हाशमी
दर्द होते हैं कई दिल में छुपाने के लिए
अदीम हाशमी
चल दिया वो देख कर पहलू मिरी तक़्सीर का
अदीम हाशमी
बस कोई ऐसी कमी सारे सफ़र में रह गई
अदीम हाशमी
बड़ा वीरान मौसम है कभी मिलने चले आओ
अदीम हाशमी
आया हूँ संग ओ ख़िश्त के अम्बार देख कर
अदीम हाशमी
आँखों में आँसुओं को उभरने नहीं दिया
अदीम हाशमी