Sad Poetry (page 340)
आग़ोश-ए-सितम में ही छुपा ले कोई आ कर
अदीम हाशमी
आँसू
अदील ज़ैदी
तू जो चाहे भी तो सय्याद नहीं होने के
अदील ज़ैदी
सहरा-ओ-दश्त-ओ-सर्व-ओ-समन का शरीक था
अदील ज़ैदी
मोहब्बत की सज़ा पाई बहुत है
अदील ज़ैदी
हम ने थामा यक़ीं को गुमाँ छोड़ कर
अदील ज़ैदी
डराएगी भला क्या तेरी गर्दिश आसमाँ मुझ को
अदील ज़ैदी
बस लम्हे भर में फ़ैसला करना पड़ा मुझे
अदील ज़ैदी
राहत की जुस्तुजू में ख़ुशी की तलाश में
अदीब सहारनपुरी
नग़्मा-ए-इश्क़-ए-बुताँ और ज़रा आहिस्ता
अदीब सहारनपुरी
मिरे शौक़-ए-जुस्तुजू का किसे ए'तिबार होता
अदीब सहारनपुरी
मंज़िलें न भूलेंगे राह-रौ भटकने से
अदीब सहारनपुरी
बख़्शे फिर उस निगाह ने अरमाँ नए नए
अदीब सहारनपुरी
किस की ख़ल्वत से निखर कर सुब्ह-दम आती है धूप
अदीब ख़लवत
ख़ामुशी से हुई फ़ुग़ाँ से हुई
अदा जाफ़री
जो चराग़ सारे बुझा चुके उन्हें इंतिज़ार कहाँ रहा
अदा जाफ़री
अभी सहीफ़ा-ए-जाँ पर रक़म भी क्या होगा
अदा जाफ़री
तुम जो सियाने हो गुन वाले हो
अदा जाफ़री
साज़-ए-सुख़न बहाना है
अदा जाफ़री
मैं साज़ ढूँडती रही
अदा जाफ़री
क्यूँ
अदा जाफ़री
ज़बाँ को हुक्म निगाह-ए-करम को पहचाने
अदा जाफ़री
वो लम्हा कि ख़ामोशी-ए-शब नग़्मा-सरा थी
अदा जाफ़री
वैसे ही ख़याल आ गया है
अदा जाफ़री
उजाला दे चराग़-ए-रहगुज़र आसाँ नहीं होता
अदा जाफ़री
शायद अभी है राख में कोई शरार भी
अदा जाफ़री
रोज़-ओ-शब की कोई सूरत तो बना कर रख्खूँ
अदा जाफ़री
निगाह ओट रहूँ कासा-ए-ख़बर में रहूँ
अदा जाफ़री
न बाम-ओ-दश्त न दरिया न कोहसार मिले
अदा जाफ़री
मुझे रंग-ए-ख़्वाब से ज़िंदगी का यक़ीं मिला
अदा जाफ़री