Couplets Poetry (page 244)
हँसता पानी रोता पानी
नासिर काज़मी
हमारे घर की दीवारों पे 'नासिर'
नासिर काज़मी
हाल-ए-दिल हम भी सुनाते लेकिन
नासिर काज़मी
गिरफ़्ता-दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने
नासिर काज़मी
गए दिनों का सुराग़ ले कर किधर से आया किधर गया वो
नासिर काज़मी
दिन गुज़ारा था बड़ी मुश्किल से
नासिर काज़मी
दिन भर तो मैं दुनिया के धंदों में खोया रहा
नासिर काज़मी
दिल तो मेरा उदास है 'नासिर'
नासिर काज़मी
दिल धड़कने का सबब याद आया
नासिर काज़मी
दाएम आबाद रहेगी दुनिया
नासिर काज़मी
चुप चुप क्यूँ रहते हो 'नासिर'
नासिर काज़मी
बुलाऊँगा न मिलूँगा न ख़त लिखूँगा तुझे
नासिर काज़मी
भरी दुनिया में जी नहीं लगता
नासिर काज़मी
अपनी धुन में रहता हूँ
नासिर काज़मी
अकेले घर से पूछती है बे-कसी
नासिर काज़मी
ऐ दोस्त हम ने तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद
नासिर काज़मी
आरज़ू है कि तू यहाँ आए
नासिर काज़मी
आँच आती है तिरे जिस्म की उर्यानी से
नासिर काज़मी
आज तो बे-सबब उदास है जी
नासिर काज़मी
आज देखा है तुझ को देर के बअ'द
नासिर काज़मी
हिचकियाँ रात दर्द तन्हाई
नासिर जौनपुरी
ता-अबद जिस का न साया जाए
नासिर बशीर
दीवार ख़स्ता-हाल है और दर उदास है
नासिर बशीर
पुर्सिश-ए-हाल से ग़म और न बढ़ जाए कहीं
नश्तर ख़ानक़ाही
मिरी क़ीमत को सुनते हैं तो गाहक लौट जाते हैं
नश्तर ख़ानक़ाही
बिछड़ कर उस से सीखा है तसव्वुर को बदन करना
नश्तर ख़ानक़ाही
अब तक हमारी उम्र का बचपन नहीं गया
नश्तर ख़ानक़ाही
ये राह-ए-तमन्ना है यहाँ देख के चलना
नसीर तुराबी
ये हवा सारे चराग़ों को उड़ा ले जाएगी
नसीर तुराबी
वो हम-सफ़र था मगर उस से हम-नवाई न थी
नसीर तुराबी