Couplets Poetry (page 245)

तुझे क्या ख़बर मिरे बे-ख़बर मिरा सिलसिला कोई और है

नसीर तुराबी

मिलने की तरह मुझ से वो पल भर नहीं मिलता

नसीर तुराबी

मैं इक शजर की तरह रह-गुज़र में ठहरा हूँ

नसीर तुराबी

इस कड़ी धूप में साया कर के

नसीर तुराबी

अदावतें थीं, तग़ाफ़ुल था, रंजिशें थीं बहुत

नसीर तुराबी

आज की रात उजाले मिरे हम-साया हैं

नसीर तुराबी

उन से मायूस-ए-इल्तिफ़ात नहीं

नसीर आरज़ू

जिगर में दर्द तो है दिल में इज़्तिराब तो है

नसीर आरज़ू

इश्क़ की अज़्मतें बजा लेकिन

नसीर आरज़ू

अब न चाहेंगे किसी और को तस्लीम मगर

नसीर आरज़ू

आओ तजदीद-ए-वफ़ा फिर से करें हम वर्ना

नसीर आरज़ू

रात भर ख़्वाब देखने वाले

नसीर अहमद नासिर

मोहब्बत के ठिकाने ढूँढती है

नसीर अहमद नासिर

लोग फिरते हैं भरे शहर की तंहाई में

नसीर अहमद नासिर

ख़मोशी झाँकती है खिड़कियों से

नसीर अहमद नासिर

जब पुकारा किसी मुसाफ़िर ने

नसीर अहमद नासिर

हवा गुम-सुम खड़ी है रास्ते में

नसीर अहमद नासिर

फ़लसफ़े सारे किताबों में उलझ कर रह गए

नसीर अहमद नासिर

अभी वो आँख भी सोई नहीं है

नसीर अहमद नासिर

वो ज़ुल्म भी अब ज़ुल्म की हद तक नहीं करते

नसीम शाहजहाँपुरी

तन्हाई के लम्हात का एहसास हुआ है

नसीम शाहजहाँपुरी

सर-ए-महशर अगर पुर्सिश हुई मुझ से तो कह दूँगा

नसीम शाहजहाँपुरी

मैं ने माना आप ने सब कुछ भुला डाला मगर

नसीम शाहजहाँपुरी

कुछ ख़ुद भी हूँ मैं इश्क़ में अफ़्सुर्दा ओ ग़मगीं

नसीम शाहजहाँपुरी

सफ़र का मरहला-ए-सख़्त ही ग़नीमत था

नसीम सहर

लफ़्ज़ भी जिस अहद में खो बैठे अपना ए'तिबार

नसीम सहर

कभी तो सर्द लगा दोपहर का सूरज भी

नसीम सहर

जो याद-ए-यार से गुफ़्त-ओ-शुनीद कर ली है

नसीम सहर

जो बात की थी हवा में बिखरने वाली थी

नसीम सहर

हुदूद-ए-वक़्त के दरवाज़े मुंतज़िर हैं 'नसीम'

नसीम सहर