Couplets Poetry (page 553)
यारों के इख़्लास से पहले दिल का मिरे ये हाल न था
अख़्तर अंसारी
याद-ए-माज़ी अज़ाब है या-रब
अख़्तर अंसारी
वो माज़ी जो है इक मजमुआ अश्कों और आहों का
अख़्तर अंसारी
उस से पूछे कोई चाहत के मज़े
अख़्तर अंसारी
सुनने वाले फ़साना तेरा है
अख़्तर अंसारी
शबाब-ए-दर्द मिरी ज़िंदगी की सुब्ह सही
अख़्तर अंसारी
शबाब नाम है उस जाँ-नवाज़ लम्हे का
अख़्तर अंसारी
समझता हूँ मैं सब कुछ सिर्फ़ समझाना नहीं आता
अख़्तर अंसारी
रोए बग़ैर चारा न रोने की ताब है
अख़्तर अंसारी
रंग ओ बू में डूबे रहते थे हवास
अख़्तर अंसारी
रगों में दौड़ती हैं बिजलियाँ लहू के एवज़
अख़्तर अंसारी
मिला के क़तरा-ए-शबनम में रंग ओ निकहत-ए-गुल
अख़्तर अंसारी
मिरी ख़बर तो किसी को नहीं मगर 'अख़्तर'
अख़्तर अंसारी
मैं किसी से अपने दिल की बात कह सकता न था
अख़्तर अंसारी
कोई रोए तो मैं बे-वजह ख़ुद भी रोने लगता हूँ
अख़्तर अंसारी
कोई मआल-ए-मोहब्बत मुझे बताओ नहीं
अख़्तर अंसारी
जब से मुँह को लग गई 'अख़्तर' मोहब्बत की शराब
अख़्तर अंसारी
इस में कोई मिरा शरीक नहीं
अख़्तर अंसारी
इलाज-ए-'अख़्तर'-ए-ना-काम क्यूँ नहीं मुमकिन
अख़्तर अंसारी
हाँ कभी ख़्वाब-ए-इश्क़ देखा था
अख़्तर अंसारी
दूसरों का दर्द 'अख़्तर' मेरे दिल का दर्द है
अख़्तर अंसारी
दिल-ए-फ़सुर्दा में कुछ सोज़ ओ साज़ बाक़ी है
अख़्तर अंसारी
अपनी उजड़ी हुई दुनिया की कहानी हूँ मैं
अख़्तर अंसारी
ऐ सोज़-ए-जाँ-गुदाज़ अभी मैं जवान हूँ
अख़्तर अंसारी
आरज़ू को रूह में ग़म बन के रहना आ गया
अख़्तर अंसारी
तमाम उम्र गुज़र जाती है कभी पल में
अख़्तर अमान
हमें हर आने वाला ज़ख़्म-ए-ताज़ा दे के जाता है
अख़्तर अमान
बदन के शहर में आबाद इक दरिंदा है
अख़्तर अमान
हर सम्त से तूफ़ान की आमद की हैं ख़बरें
अख़लाक़ आतिफ़
वो और होंगे जो कार-ए-हवस पे ज़िंदा हैं
अकबर मासूम