Couplets Poetry (page 562)

आज भी उस के मिरे बीच है दुनिया हाइल

ऐन ताबिश

ये कौन वक़्त की सूरत मुझे बदलता है

ऐन सलाम

तिश्नगी पीने की शब थी

ऐन इरफ़ान

मेरी तरफ़ सभी कि निगाहें थीं और मैं

ऐन इरफ़ान

मिरा वजूद जो पत्थर दिखाई देता है

ऐन इरफ़ान

करता है कार-ए-रौशनी मुझ को जला के दिन

ऐन इरफ़ान

कभी सोचूँ कि ख़ुद मैं लौट आऊँ

ऐन इरफ़ान

जहाँ तक डूबने का डर है तुम को

ऐन इरफ़ान

हो दिन कि चाहे रात कोई मसअला नहीं

ऐन इरफ़ान

हादिसा कौन सा हुआ पहले

ऐन इरफ़ान

ग़र्क़ होते जहाज़ देखे हैं

ऐन इरफ़ान

गामज़न हैं हम मुसलसल अजनबी मंज़िल की सम्त

ऐन इरफ़ान

बे-मक़्सद महफ़िल से बेहतर तन्हाई

ऐन इरफ़ान

बस एक धुन थी समुंदर को पार करने की

ऐन इरफ़ान

बहुत नज़दीक थे तस्वीर में हम

ऐन इरफ़ान

सब के आँगन झाँकने वाले हम से ही क्यूँ बैर तुझे

अहसन यूसुफ़ ज़ई

रोज़ ओ शब बेच दिए हैं मैं ने

अहसन यूसुफ़ ज़ई

नींद को लोग मौत कहते हैं

अहसन यूसुफ़ ज़ई

लुटेरों के लिए सोती हैं आँखें

अहसन यूसुफ़ ज़ई

काग़ज़ की नाव हूँ जिसे तिनका डुबो सके

अहसन यूसुफ़ ज़ई

हमारी साँसें मिली हैं गिन के

अहसन यूसुफ़ ज़ई

बरसात थम चुकी है मगर हर शजर के पास

अहसन यूसुफ़ ज़ई

गर्म-ए-सफ़र है गर्म-ए-सफ़र रह मुड़ मुड़ कर मत पीछे देख

अहसन शफ़ीक़

ये सदमा जीते जी दिल से हमारे जा नहीं सकता

अहसन मारहरवी

तंग आ गया हूँ वुस्अत-ए-मफ़हूम-ए-इश्क़ से

अहसन मारहरवी

तमाम उम्र इसी रंज में तमाम हुई

अहसन मारहरवी

शेख़ को जन्नत मुबारक हम को दोज़ख़ है क़ुबूल

अहसन मारहरवी

साक़ी ओ वाइज़ में ज़िद है बादा-कश चक्कर में है

अहसन मारहरवी

रोक ले ऐ ज़ब्त जो आँसू के चश्म-ए-तर में है

अहसन मारहरवी

राह-ए-उल्फ़त का निशाँ ये है कि वो है बे-निशाँ

अहसन मारहरवी