Couplets Poetry (page 564)

कौन डूबेगा किसे पार उतरना है 'ज़फ़र'

अहमद ज़फ़र

जो रेज़ा रेज़ा नहीं दिल उसे नहीं कहते

अहमद ज़फ़र

अंग अंग से रंग रंग के फूल बरसते देखे कौन

अहमद ज़फ़र

वो करे बात तो हर लफ़्ज़ से ख़ुश्बू आए

अहमद वसी

अपनी ही ज़ात के सहरा में आज

अहमद वसी

कितनी ख़ुश-हाल है सारी दुनिया

अहमद वहीद अख़्तर

इस क़दर महफ़ूज़ रहता है कि वो

अहमद सोज़

वो मेरे अलावा मुझे चाहता है

अहमद शनास

शब-ओ-रोज़ नख़्ल-ए-वजूद को नया एक बर्ग-ए-अना दिया

अहमद शनास

सात क़ुल्ज़ुम हैं मिरे सीने में

अहमद शनास

रफ़्ता रफ़्ता लफ़्ज़ गूँगे हो गए

अहमद शनास

पॉप धमाके में हम भक्ती ढूँड रहे हैं

अहमद शनास

फूल बाहर है कि अंदर है मिरे सीने में

अहमद शनास

फिर इस के ब'अद पत्थर हो गया आँखों का पानी

अहमद शनास

पस-ए-ख़याल हूँ कितना ज़ुहूर कितना हूँ

अहमद शनास

नौ-जवानों का क़बीला उस के पीछे चल पड़ा

अहमद शनास

मैं ने भी बच्चों को अपनी निस्बत से आज़ाद किया

अहमद शनास

मैं उस की पहचान हूँ या वो मेरी

अहमद शनास

मैं ख़ुद अपने आप से हूँ बेगाना सा

अहमद शनास

मैं इकतिशाफ़ की हिजरत बहिश्त से लाया

अहमद शनास

मैं बात करने लगा था कि लफ़्ज़ गूँगे हुए

अहमद शनास

लफ़्ज़ों की दस्तरस में मुकम्मल नहीं हूँ मैं

अहमद शनास

लफ़्ज़ जब उतरा मिरी आँखें मुनव्वर हो गईं

अहमद शनास

ख़ुद को पाया था न खोया मैं ने

अहमद शनास

कौन क़तरे में उठाता है तलातुम

अहमद शनास

जिस्म भूका है तो है रूह भी प्यासी मेरी

अहमद शनास

जानकारी खेल लफ़्ज़ों का ज़बाँ का शोर है

अहमद शनास

ग़र्क़ करता है न देता है किनारा ही मुझे

अहमद शनास

एक बच्चा ज़ेहन से पैसा कमाने की मशीन

अहमद शनास

चाँद में दरवेश है जुगनू में जोगी

अहमद शनास