Couplets Poetry (page 563)

क़ासिद नई अदा से अदा-ए-पयाम हो

अहसन मारहरवी

नाकाम हैं असर से दुआएँ दुआ से हम

अहसन मारहरवी

मुतमइन अपने यक़ीं पर अगर इंसाँ हो जाए

अहसन मारहरवी

मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है

अहसन मारहरवी

मेरा हाल-ए-ज़ार तो देखा मगर

अहसन मारहरवी

मौत ही आप के बीमार की क़िस्मत में न थी

अहसन मारहरवी

क्यूँ चुप हैं वो बे-बात समझ में नहीं आता

अहसन मारहरवी

किसी माशूक़ का आशिक़ से ख़फ़ा हो जाना

अहसन मारहरवी

किसी को भेज के ख़त हाए ये कैसा अज़ाब आया

अहसन मारहरवी

कर के दफ़्न अपने पराए चल दिए

अहसन मारहरवी

जब मुलाक़ात हुई तुम से तो तकरार हुई

अहसन मारहरवी

इश्क़ रुस्वा-कुन-ए-आलम वो है 'अहसन' जिस से

अहसन मारहरवी

हम अपनी बे-क़रारी-ए-दिल से हैं बे-क़रार

अहसन मारहरवी

हमारा इंतिख़ाब अच्छा नहीं ऐ दिल तो फिर तू ही

अहसन मारहरवी

है वो जब दिल में तो कैसी जुस्तुजू

अहसन मारहरवी

हालत दिल-ए-बेताब की देखी नहीं जाती

अहसन मारहरवी

एक दिल है एक हसरत एक हम हैं एक तुम

अहसन मारहरवी

गली का आम सा चेहरा भी प्यारा होने लगता है

अहमद अताउल्लाह

जो अर्ज़ां है तो है उन की मता-ए-आबरू वर्ना

अहमक़ फफूँदवी

नगर नगर में नई बस्तियाँ बसाई गईं

अहमद ज़िया

न जाने कितने मराहिल के ब'अद पाया था

अहमद ज़िया

मुझ को मिरे वजूद से कोई निकाल दे

अहमद ज़िया

इस क़दर पुर-ख़ुलूस लहजा है

अहमद ज़िया

है मेरा चेहरा सैकड़ों चेहरों का आईना

अहमद ज़िया

इक मैं हूँ कि लहरों की तरह चैन नहीं है

अहमद ज़िया

बस्ती बस्ती पर्बत पर्बत वहशत की है धूप 'ज़िया'

अहमद ज़िया

आँधियों की ज़द में है मेरा वजूद

अहमद ज़िया

उन से मेरी बात न पूछ

अहमद ज़फ़र

मैं मकीं हूँ न मकाँ शहर-ए-मोहब्बत का 'ज़फ़र'

अहमद ज़फ़र

क्यूँ तीरगी से इस क़दर मानूस हूँ 'ज़फ़र'

अहमद ज़फ़र