Couplets Poetry (page 566)
उसी ख़ातिर हटा ली है मसाइल से तवज्जोह
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
थे यहाँ सारे अमल रद्द-ए-अमल के मुहताज
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
तख़्लीक़ ख़ुद किया था कल अपने में एक घर
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
सुनता है यहाँ कौन समझता है यहाँ कौन
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
सारी दुनिया से अलग वहशत-ए-दिल है अपनी
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
पर्दा जो उठा दिया गया है
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
कुछ देर में ये दिल किसी गिनती में न होगा
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
कोई तस्वीर बना ले कि तुझे याद रहें
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
किसी सूरत ये नुक्ता-चीनियाँ कुछ रंग तो लाईं
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
ख़ुद अपनी ज़ात से इक मुक़तदी निकालता हूँ
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
खोलीं वो दर किसी ने भी खोला न हो जिसे
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
कहाँ मैं और कहाँ गोशा-नशीनी का ये एलान
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
कभी न बदले दिल-ए-बा-सफ़ा के तौर-तरीक़
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
कब से मैं सफ़र में हूँ मगर ये नहीं मा'लूम
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
जी-भर के सितारे जगमगाएँ
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
इश्क़ इक मशग़ला-ए-जाँ भी तो हो सकता है
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
इस इश्क़ में न पूछो हाल-ए-दिल-ए-दरीदा
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
हम कि इक उम्र रहे इश्वा-ए-दुनिया के असीर
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
गर्द की तरह सर-ए-राहगुज़र बैठे हैं
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
चराग़ उन पे जले थे बहुत हवा के ख़िलाफ़
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
चाहे हैं तमाशा मिरे अंदर कई मौसम
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
आना ज़रा तफ़रीह रहेगी
अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी
ये कौन बोलता है मिरे दिल के अंदरूँ
अहमद रिज़वान
उड़ती है ख़ाक दिल के दरीचों के आस-पास
अहमद रिज़वान
मुझे ये क्या पड़ी है कौन मेरा हम-सफ़र होगा
अहमद रिज़वान
क्या बात करूँ जो बातें तुम से करनी थीं
अहमद रिज़वान
होता न कोई कार-ए-ज़माना मिरे सुपुर्द
अहमद रिज़वान
एक मुद्दत से उसे देख रहा हूँ 'अहमद'
अहमद रिज़वान
अजनबी लोग हैं मैं जिन में घिरा रहता हूँ
अहमद रिज़वान
शिकस्त-ए-अहद-ए-सितम पर यक़ीन रखते हैं
अहमद रियाज़