Couplets Poetry (page 568)
सिर्फ़ इस शौक़ से पूछी हैं हज़ारों बातें
अहमद नदीम क़ासमी
शाम को सुब्ह-ए-चमन याद आई
अहमद नदीम क़ासमी
सारी दुनिया हमें पहचानती है
अहमद नदीम क़ासमी
पा कर भी तो नींद उड़ गई थी
अहमद नदीम क़ासमी
'नदीम' जो भी मुलाक़ात थी अधूरी थी
अहमद नदीम क़ासमी
'नदीम' जो भी मुलाक़ात थी अधूरी थी
अहमद नदीम क़ासमी
मुसाफ़िर ही मुसाफ़िर हर तरफ़ हैं
अहमद नदीम क़ासमी
मुझ को दुश्मन के इरादों पे भी प्यार आता है
अहमद नदीम क़ासमी
मुझे मंज़ूर गर तर्क-ए-तअल्लुक़ है रज़ा तेरी
अहमद नदीम क़ासमी
मिरे ख़ुदा ने किया था मुझे असीर-ए-बहिश्त
अहमद नदीम क़ासमी
मिरा वजूद मिरी रूह को पुकारता है
अहमद नदीम क़ासमी
मर जाता हूँ जब ये सोचता हूँ
अहमद नदीम क़ासमी
मैं ने समझा था कि लौट आते हैं जाने वाले
अहमद नदीम क़ासमी
मैं तेरे कहे से चुप हूँ लेकिन
अहमद नदीम क़ासमी
मैं कश्ती में अकेला तो नहीं हूँ
अहमद नदीम क़ासमी
लोग कहते हैं कि साया तिरे पैकर का नहीं
अहमद नदीम क़ासमी
कुछ खेल नहीं है इश्क़ करना
अहमद नदीम क़ासमी
किस तवक़्क़ो पे किसी को देखें
अहमद नदीम क़ासमी
किस दिल से करूँ विदाअ' तुझ को
अहमद नदीम क़ासमी
ख़ुदा करे कि तिरी उम्र में गिने जाएँ
अहमद नदीम क़ासमी
ख़ुद को तो 'नदीम' आज़माया
अहमद नदीम क़ासमी
कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगा
अहमद नदीम क़ासमी
जिस भी फ़नकार का शहकार हो तुम
अहमद नदीम क़ासमी
जन्नत मिली झूटों को अगर झूट के बदले
अहमद नदीम क़ासमी
इतना मानूस हूँ सन्नाटे से
अहमद नदीम क़ासमी
हर लम्हा अगर गुरेज़-पा है
अहमद नदीम क़ासमी
ग़म-ए-जानाँ ग़म-ए-दौराँ की तरफ़ यूँ आया
अहमद नदीम क़ासमी
फ़रेब खाने को पेशा बना लिया हम ने
अहमद नदीम क़ासमी
इक उम्र के ब'अद मुस्कुरा कर
अहमद नदीम क़ासमी
इक सफ़ीना है तिरी याद अगर
अहमद नदीम क़ासमी