Couplets Poetry (page 203)
जब उस ने मिरा ख़त न छुआ हाथ से अपने
पीर शेर मोहम्मद आजिज़
तारीख़-ए-काएनात-ए-इबादत जुनूँ से है
पयाम फ़तेहपुरी
सुकून दे न सकीं राहतें ज़माने की
पयाम फ़तेहपुरी
फैला फ़ज़ा में नग़्मा-ए-ज़ंजीर-ए-मर्हबा
पयाम फ़तेहपुरी
नफ़स नफ़स पे यहाँ रहमतों की बारिश है
पयाम फ़तेहपुरी
मलामातों से जुनूँ में न कुछ कमी आई
पयाम फ़तेहपुरी
ख़ुशी विसाल की अब है न रंज-ए-तन्हाई
पयाम फ़तेहपुरी
अजीब शय है तसव्वुर की कार-फ़रमाई
पयाम फ़तेहपुरी
जिन के होंटों पे हँसी पाँव में छाले होंगे
परवाज़ जालंधरी
ये ताज के साए में ज़र-ओ-सीम के ख़िर्मन
परवेज़ शाहिदी
याद हैं आप के तोड़े हुए पैमाँ हम को
परवेज़ शाहिदी
सख़्त-जाँ वो हूँ कि मक़्तल से सर-अफ़राज़ आया
परवेज़ शाहिदी
न जाने कह गए क्या आप मुस्कुराने में
परवेज़ शाहिदी
मिरी ज़िंदगी की ज़ीनत हुई आफ़त-ओ-बला से
परवेज़ शाहिदी
गुज़रा है कौन फूल खिलाता ख़िराम से
परवेज़ शाहिदी
गीत हरियाली के गाएँगे सिसकते हुए खेत
परवेज़ शाहिदी
अभी से सुब्ह-ए-गुलशन रक़्स-फ़रमा है निगाहों में
परवेज़ शाहिदी
वक़्त अच्छा ज़रूर आता है
परवेज़ साहिर
'साहिर' ये मेरा दीदा-ए-गिर्यां है और मैं
परवेज़ साहिर
पूछा था मैं ने जब उसे क्या मुझ से इश्क़ है?
परवेज़ साहिर
मेरी फ़ितरत ही में शामिल है मोहब्बत करना
परवेज़ साहिर
इतना बे-आसरा नहीं हूँ मैं
परवेज़ साहिर
बस एक ध्यान की मैं उँगली थाम रखी है
परवेज़ साहिर
सारे पत्थर नहीं होते हैं मलामत का निशाँ
परवेज़ अख़्तर
ज़ाहिद सँभल ग़ुरूर ख़ुदा को नहीं पसंद
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
वो ही आसान करेगा मिरी दुश्वारी को
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
वाइ'ज़ को लअ'न-तअ'न की फ़ुर्सत है किस तरह
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
उसी दिन से मुझे दोनों की बर्बादी का ख़तरा था
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ठहर जाओ बोसे लेने दो न तोड़ो सिलसिला
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
सुनते सुनते वाइ'ज़ों से हज्व-ए-मय
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़