Couplets Poetry (page 405)

रूठे लोगों को मनाने में मज़ा आता है

फ़व्वाद अहमद

जो पलकों से गिर जाए आँसू का क़तरा

फ़व्वाद अहमद

दिल ओ नज़र की बक़ा है फ़क़त मोहब्बत में

फ़व्वाद अहमद

बे-कैफ़ कट रही थी मुसलसल ये ज़िंदगी

फ़व्वाद अहमद

उस के प्याले में ज़हर है कि शराब

फ़ातिमा हसन

उलझ के रह गए चेहरे मिरी निगाहों में

फ़ातिमा हसन

ठेस कुछ ऐसी लगी है कि बिखरना है उसे

फ़ातिमा हसन

सुनती रही मैं सब के दुख ख़ामोशी से

फ़ातिमा हसन

सुन रहे हैं कान जो कहते हैं सब

फ़ातिमा हसन

सुकून-ए-दिल के लिए इश्क़ तो बहाना था

फ़ातिमा हसन

रात दरीचे तक आ कर रुक जाती है

फ़ातिमा हसन

पूरी न अधूरी हूँ न कम-तर हूँ न बरतर

फ़ातिमा हसन

पहचान जिन से थी वो हवाले मिटा दिए

फ़ातिमा हसन

मकाँ बनाते हुए छत बहुत ज़रूरी है

फ़ातिमा हसन

मैं ने पहुँचाया उसे जीत के हर ख़ाने में

फ़ातिमा हसन

मैं ने माँ का लिबास जब पहना

फ़ातिमा हसन

क्या कहूँ उस से कि जो बात समझता ही नहीं

फ़ातिमा हसन

कोई नहीं है मेरे जैसा चारों ओर

फ़ातिमा हसन

कितने अच्छे लोग थे क्या रौनक़ें थीं उन के साथ

फ़ातिमा हसन

ख़्वाबों पर इख़्तियार न यादों पे ज़ोर है

फ़ातिमा हसन

कब उस की फ़त्ह की ख़्वाहिश को जीत सकती थी

फ़ातिमा हसन

हमारी नस्ल सँवरती है देख कर हम को

फ़ातिमा हसन

दिखाई देता है जो कुछ कहीं वो ख़्वाब न हो

फ़ातिमा हसन

बिछड़ रहा था मगर मुड़ के देखता भी रहा

फ़ातिमा हसन

भूल गई हूँ किस से मेरा नाता था

फ़ातिमा हसन

बहुत गहरी है उस की ख़ामुशी भी

फ़ातिमा हसन

और कोई नहीं है उस के सिवा

फ़ातिमा हसन

अधूरे लफ़्ज़ थे आवाज़ ग़ैर-वाज़ेह थी

फ़ातिमा हसन

आँखों में न ज़ुल्फ़ों में न रुख़्सार में देखें

फ़ातिमा हसन

उम्र भर मिलने नहीं देती हैं अब तो रंजिशें

फ़सीह अकमल