Couplets Poetry (page 511)

अजब था नश्शा-ए-वारफ़तगी-ए-वस्ल उसे

आरिफ़ इमाम

अभी तो मैं ने फ़क़त बारिशों को झेला है

आरिफ़ इमाम

मुझ को जन्नत से उठा कर ये कहाँ फेंक दिया

आरिफ़ अंसारी

ज़ात का आईना जब देखा तो हैरानी हुई

आरिफ़ अब्दुल मतीन

वफ़ा निगाह की तालिब है इम्तिहाँ की नहीं

आरिफ़ अब्दुल मतीन

तितलियाँ रंगों का महशर हैं कभी सोचा न था

आरिफ़ अब्दुल मतीन

तीरा-ओ-तार ख़लाओं में भटकता रहा ज़ेहन

आरिफ़ अब्दुल मतीन

था ए'तिमाद-ए-हुस्न से तू इस क़दर तही

आरिफ़ अब्दुल मतीन

कभी ख़याल के रिश्तों को भी टटोल के देख

आरिफ़ अब्दुल मतीन

हमीं ने रास्तों की ख़ाक छानी

आरिफ़ अब्दुल मतीन

चाँद मेरे घर में उतरा था कहीं डूबा न था

आरिफ़ अब्दुल मतीन

फूँक कर मैं ने आशियाने को

आरिफ़ अब्बासी

नज़र गुम हो गई जल्वों में 'आरिफ़'

आरिफ़ अब्बासी

हर एक लम्हा सरों पे है सानेहा ऐसा

अक़ील शादाब

शायद कहीं इस प्यार में थोड़ी सी कमी है

अक़ील नोमानी

मैं भी सच कहता हूँ इस जुर्म में दुनिया वालो

अक़ील दानिश

फ़ितरत का ये सितम भी है 'दानिश' अजीब चीज़

अक़ील दानिश

अब भी कुछ लोग मोहब्बत पे यक़ीं रखते हैं

अक़ील दानिश

हर इश्क़ के मंज़र में था इक हिज्र का मंज़र

अक़ील अब्बास जाफ़री

बस वही अश्क मिरा हासिल-ए-गिर्या है 'अक़ील'

अक़ील अब्बास जाफ़री

उजालती नहीं अब मुझ को कोई तारीकी

अनवर सिद्दीक़ी

सारी शफ़क़ समेट के सूरज चला गया

अनवर सिद्दीक़ी

कितने सुबुक-दिल हुए तुझ से बिछड़ने के बाद

अनवर सिद्दीक़ी

डुबोए देता है ख़ुद-आगही का बार मुझे

अनवर सिद्दीक़ी

बिखर के टूट गए हम बिखरती दुनिया में

अनवर सिद्दीक़ी

ज़िंदगी की ज़रूरतों का यहाँ

अनवर शऊर

ज़माने के झमेलों से मुझे क्या

अनवर शऊर

वो रंग रंग के छींटे पड़े कि उस के ब'अद

अनवर शऊर

वो मुझ से रूठ न जाती तो और क्या करती

अनवर शऊर

ठहर सकती है कहाँ उस रुख़-ए-ताबाँ पे नज़र

अनवर शऊर