Couplets Poetry (page 513)

इश्क़ तो हर शख़्स करता है 'शुऊर'

अनवर शऊर

इस तअल्लुक़ में नहीं मुमकिन तलाक़

अनवर शऊर

हम बुलाते वो तशरीफ़ लाते रहे

अनवर शऊर

हो गए दिन जिन्हें भुलाए हुए

अनवर शऊर

हमेशा हात में रहते हैं फूल उन के लिए

अनवर शऊर

हैं पत्थरों की ज़द पे तुम्हारी गली में हम

अनवर शऊर

गो मुझे एहसास-ए-तन्हाई रहा शिद्दत के साथ

अनवर शऊर

गो कठिन है तय करना उम्र का सफ़र तन्हा

अनवर शऊर

फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था

अनवर शऊर

दोस्त कहता हूँ तुम्हें शाएर नहीं कहता 'शुऊर'

अनवर शऊर

चले आया करो मेरी तरफ़ भी!

अनवर शऊर

बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है

अनवर शऊर

बहुत इरादा किया कोई काम करने का

अनवर शऊर

बहरूप नहीं भरा है मैं ने

अनवर शऊर

अच्छों को तो सब ही चाहते हैं

अनवर शऊर

अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँ

अनवर शऊर

आदमी के लिए रोना है बड़ी बात 'शुऊर'

अनवर शऊर

आदमी बन के मिरा आदमियों में रहना

अनवर शऊर

ज़मीं का रिज़्क़ हूँ लेकिन नज़र फ़लक पर है

अनवर सदीद

यूँ तसल्ली को तो इक याद भी काफ़ी थी मगर

अनवर सदीद

उस के बग़ैर ज़िंदगी कितनी फ़ुज़ूल है

अनवर सदीद

तू जिस्म है तो मुझ से लिपट कर कलाम कर

अनवर सदीद

शिकवा किया ज़माने का तो उस ने ये कहा

अनवर सदीद

सैल-ए-ज़माँ में डूब गए मशहूर-ए-ज़माना लोग

अनवर सदीद

पँख हिला कर शाम गई है इस आँगन से

अनवर सदीद

कोई भी पेचीदगी हाएल नहीं अनवर-'सदीद'

अनवर सदीद

खुली ज़बान तो ज़र्फ़ उन का हो गया ज़ाहिर

अनवर सदीद

ख़ाक हूँ लेकिन सरापा नूर है मेरा वजूद

अनवर सदीद

कल शाम परिंदों को उड़ते हुए यूँ देखा

अनवर सदीद

जो फूल झड़ गए थे जो आँसू बिखर गए

अनवर सदीद