Couplets Poetry (page 514)
जागती आँख से जो ख़्वाब था देखा 'अनवर'
अनवर सदीद
हम ने हर सम्त बिछा रक्खी हैं आँखें अपनी
अनवर सदीद
घुप-अँधेरे में भी उस का जिस्म था चाँदी का शहर
अनवर सदीद
दुख के ताक़ पे शाम ढले
अनवर सदीद
दम-ए-विसाल तिरी आँच इस तरह आई
अनवर सदीद
चश्मे की तरह फूटा और आप ही बह निकला
अनवर सदीद
चला मैं जानिब-ए-मंज़िल तो ये हुआ मालूम
अनवर सदीद
आशियानों में न जब लौटे परिंदे तो 'सदीद'
अनवर सदीद
वक़्त जब करवटें बदलता है
अनवर साबरी
रोज़ आपस में लड़ा करते हैं अर्बाब-ए-ख़िरद
अनवर साबरी
रोज़ आपस में लड़ा करते हैं अर्बाब-ए-ख़िरद
अनवर साबरी
मैं जो रोया उन की आँखों में भी आँसू आ गए
अनवर साबरी
आप करते जो एहतिराम-ए-बुताँ
अनवर साबरी
मेरे कमरे में सभी चीज़ें हैं आज
अनवर नदीम
हो सकता है कोई हमें भी ढूँडे इन बंजारों में
अनवर नदीम
मुझे फूँकने से पहले मिरा दिल निकाल लेना
अनवर मिर्ज़ापुरी
मिरे अश्क भी हैं इस में ये शराब उबल न जाए
अनवर मिर्ज़ापुरी
मैं नज़र से पी रहा हूँ ये समाँ बदल न जाए
अनवर मिर्ज़ापुरी
मैं ख़ुश हूँ अगर गुलशन के लिए कुछ मेरा लहू काम आ जाए
अनवर मिर्ज़ापुरी
अकेला पा के मुझ को याद उन की आ तो जाती है
अनवर मिर्ज़ापुरी
ऐ काश हमारी क़िस्मत में ऐसी भी कोई शाम आ जाए
अनवर मिर्ज़ापुरी
अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी
अनवर मिर्ज़ापुरी
वहाँ ज़ेर-ए-बहस आते ख़त-ओ-ख़ाल ओ ख़ू-ए-ख़ूबाँ
अनवर मसूद
उर्दू से हो क्यूँ बेज़ार इंग्लिश से क्यूँ इतना प्यार
अनवर मसूद
सोचता हूँ कि बुझा दूँ मैं ये कमरे का दिया
अनवर मसूद
सिर्फ़ मेहनत क्या है 'अनवर' कामयाबी के लिए
अनवर मसूद
साथ उस के कोई मंज़र कोई पस-ए-मंज़र न हो
अनवर मसूद
रात आई है बलाओं से रिहाई देगी
अनवर मसूद
पलकों के सितारे भी उड़ा ले गई 'अनवर'
अनवर मसूद
नर्सरी का दाख़िला भी सरसरी मत जानिए
अनवर मसूद