Couplets Poetry (page 516)

हम से वफ़ा-शिआर को भी तेरे रू-ब-रू

अनवर जमाल अनवर

हम फ़ितरतन इंसाँ हैं फ़रिश्ते तो नहीं हैं

अनवर जमाल अनवर

है तक़ाज़ा-ए-तहज़ीब 'अनवर'

अनवर जमाल अनवर

दामन पे तो हर एक के छीटें हैं ख़ून की

अनवर जमाल अनवर

बहुत आसान है मुश्तरका दिलों में तफ़रीक़

अनवर जमाल अनवर

सभी के अपने मसाइल सभी की अपनी अना

अनवर जलालपुरी

न जाने क्यूँ अधूरी ही मुझे तस्वीर जचती है

अनवर जलालपुरी

मुसलसल धूप में चलना चराग़ों की तरह जलना

अनवर जलालपुरी

मेरा हर शेर हक़ीक़त की है ज़िंदा तस्वीर

अनवर जलालपुरी

मैं ने लिख्खा है उसे मर्यम ओ सीता की तरह

अनवर जलालपुरी

कोई पूछेगा जिस दिन वाक़ई ये ज़िंदगी क्या है

अनवर जलालपुरी

चाहो तो मिरी आँखों को आईना बना लो

अनवर जलालपुरी

अब नाम नहीं काम का क़ाएल है ज़माना

अनवर जलालपुरी

ये दिल का कर्ब लबों तक कभी न आएगा

अनवार फ़िरोज़

वो जो गर्दन झुकाए बैठे हैं

अनवर देहलवी

उन से हम लौ लगाए बैठे हैं

अनवर देहलवी

थक के बैठे हो दर-ए-सौम'अ पर क्या 'अनवर'

अनवर देहलवी

सूरत छुपाइए किसी सूरत-परस्त से

अनवर देहलवी

शर्म भी इक तरह की चोरी है

अनवर देहलवी

क़ामत ही लिखा हम ने सदा जा-ए-क़यामत

अनवर देहलवी

पी भी जा शैख़ कि साक़ी की इनायत है शराब

अनवर देहलवी

फेंकिए क्यूँ मय-ए-नाक़िस साक़ी

अनवर देहलवी

नींद का काम गरचे आना है

अनवर देहलवी

नज़र आए क्या मुझ से फ़ानी की सूरत

अनवर देहलवी

नाकामी-ए-विसाल का पैग़ाम है मुझे

अनवर देहलवी

न मैं समझा न आप आए कहीं से

अनवर देहलवी

मिट्टी ख़राब है तिरे कूचे में वर्ना हम

अनवर देहलवी

मिट्टी ख़राब है तिरे कूचे में वर्ना हम

अनवर देहलवी

मिरी नुमूद से पैदा है रंग-ए-नाकामी

अनवर देहलवी

मैं गिरफ़्तार-ए-वफ़ा हूँ छुट के जाऊँगा कहाँ

अनवर देहलवी