Couplets Poetry (page 515)

नज़दीक की ऐनक से उसे कैसे मैं ढूँडूँ

अनवर मसूद

मस्जिद का ये माइक जो उठा लाए हो ऐ 'अनवर'

अनवर मसूद

मैं ने 'अनवर' इस लिए बाँधी कलाई पर घड़ी

अनवर मसूद

मैं अपने दुश्मनों का किस क़दर मम्नून हूँ 'अनवर'

अनवर मसूद

जुदा होगी कसक दिल से न उस की

अनवर मसूद

जो हँसना हँसाना होता है

अनवर मसूद

जाने किस रंग से रूठेगी तबीअत उस की

अनवर मसूद

इस वक़्त वहाँ कौन धुआँ देखने जाए

अनवर मसूद

इधर से लिया कुछ उधर से लिया

अनवर मसूद

हाँ मुझे उर्दू है पंजाबी से भी बढ़ कर अज़ीज़

अनवर मसूद

हमें क़रीना-ए-रंजिश कहाँ मयस्सर है

अनवर मसूद

डूबे हुए तारों पे मैं क्या अश्क बहाता

अनवर मसूद

दोस्तो इंग्लिश ज़रूरी है हमारे वास्ते

अनवर मसूद

दिल सुलगता है तिरे सर्द रवय्ये से मिरा

अनवर मसूद

दिल जो टूटेगा तो इक तरफ़ा चराग़ाँ होगा

अनवर मसूद

बे-हिर्स-ओ-ग़रज़ क़र्ज़ अदा कीजिए अपना

अनवर मसूद

'अनवर' उस ने न मैं ने छोड़ा है

अनवर मसूद

'अनवर' मिरी नज़र को ये किस की नज़र लगी

अनवर मसूद

अजीब लुत्फ़ था नादानियों के आलम में

अनवर मसूद

ऐ दिल-ए-नादाँ किसी का रूठना मत याद कर

अनवर मसूद

आस्तीनों की चमक ने हमें मारा 'अनवर'

अनवर मसूद

आसमाँ अपने इरादों में मगन है लेकिन

अनवर मसूद

आँखें भी हैं रस्ता भी चराग़ों की ज़िया भी

अनवर मसूद

आइना देख ज़रा क्या मैं ग़लत कहता हूँ

अनवर मसूद

तुम्हारे दिल में कोई और भी है मेरे सिवा

अनवर जमाल अनवर

शहर की गलियों और सड़कों पर फिरते हैं मायूसी में

अनवर जमाल अनवर

सच ये है हम ही मोहब्बत का सबक़ पढ़ न सके

अनवर जमाल अनवर

रोज़ उठ जाती है घर में कोई दीवार नई

अनवर जमाल अनवर

कैसा मक़ाम आया मोहब्बत की राह में

अनवर जमाल अनवर

हुस्न ऐसा कि ज़माने में नहीं जिस की मिसाल

अनवर जमाल अनवर