Sad Poetry (page 208)
दे कर पिछली यादों का अम्बार मुझे
अतीक़ुल्लाह
चराग़ हाथों के बुझ रहे हैं सितारा हर रह-गुज़र में रख दे
अतीक़ुल्लाह
बहुत दिन से तुम्हें देखा नहीं था
अतीक़ुल्लाह
अंधेरा मेरे बातिन में पड़ा था
अतीक़ुल्लाह
आसमाँ का सितारा न महताब है
अतीक़ुल्लाह
आने वाला तो हर इक लम्हा गुज़र जाता है
अतीक़ुल्लाह
मैं इंसान-ए-नौअ' हूँ मैं ईसा-नफ़स हूँ
आतिफ़ ख़ान
इश्क़ पागल-पन में संजीदा न हो जाए कहीं
आतिफ़ ख़ान
दुनिया से हुए बैठे हो रू-पोश ऐ जाना
आतिफ़ ख़ान
दिए अपनी ज़ौ पे जो इतरा रहे हैं
आतिफ़ ख़ान
दे के ख़ुद ख़ून का मंज़र मुझ को
आतिफ़ ख़ान
दरमियान-ए-गुनाह-ओ-सवाब आदमी
आतिफ़ ख़ान
ये भी अच्छा है कि सहरा में बनाया है मकाँ
अतहर शाह ख़ान जैदी
ये तिरी ज़ुल्फ़ का कुंडल तो मुझे मार चला
अतहर शाह ख़ान जैदी
यूँ तसव्वुर में दबे पाँव तिरी याद आई
अतहर राज़
मुसव्विर का हाथ
अतहर राज़
फूलों से बहारों में जुदा थे तो हमीं थे
अतहर राज़
ग़म के बादल दिल-ए-नाशाद पे ऐसे छाए
अतहर राज़
यक़ीन बरसों का इम्कान कुछ दिनों का हूँ
अतहर नासिक
यही बहुत है कि अहबाब पूछ लेते हैं
अतहर नासिक
पल-दो-पल है फिर ये सोना मिट्टी का
अतहर नासिक
मैं तुझे भूलना चाहूँ भी तो ना-मुम्किन है
अतहर नासिक
ख़ुद को किसी की राह-गुज़र किस लिए करें
अतहर नासिक
कभी कभार भी कब साएबाँ किसी ने दिया
अतहर नासिक
गूँगों को ज़बान किस ने दी है
अतहर नासिक
चुप-चाप हब्स-ए-वक़्त के पिंजरे में मर गया
अतहर नासिक
ये धूप तो हर रुख़ से परेशाँ करेगी
अतहर नफ़ीस
लम्हों के अज़ाब सह रहा हूँ
अतहर नफ़ीस
कभी साया है कभी धूप मुक़द्दर मेरा
अतहर नफ़ीस
जी न सकूँ मैं जिस के बग़ैर
अतहर नफ़ीस