Sad Poetry (page 305)

न तीरगी के लिए हूँ न रौशनी के लिए

ऐन सलाम

नज़्म

ऐन रशीद

मेरे बाद आ

ऐन रशीद

करता है कार-ए-रौशनी मुझ को जला के दिन

ऐन इरफ़ान

बे-मक़्सद महफ़िल से बेहतर तन्हाई

ऐन इरफ़ान

तन्हा तन्हा सहमी सहमी ख़ामोशी

ऐन इरफ़ान

क़ल्ब की बंजर ज़मीं पर ख़्वाहिशें बोते हुए

ऐन इरफ़ान

कभी जो मिल न सकी उस ख़ुशी का हासिल है

ऐन इरफ़ान

हो दिन कि चाहे रात कोई मसअला नहीं

ऐन इरफ़ान

इक साया मेरे जैसा है

ऐन इरफ़ान

इक परिंदा शाख़ पर बैठा हुआ

ऐन इरफ़ान

धुँद है या धुआँ समझता हूँ

ऐन इरफ़ान

बला की धूप थी मैं जल रहा था

ऐन इरफ़ान

आहों की आज़ारों की आवाज़ें थीं

ऐन इरफ़ान

नींद को लोग मौत कहते हैं

अहसन यूसुफ़ ज़ई

शब-रंग परिंदे रग-ओ-रेशे में उतर जाएँ

अहसन यूसुफ़ ज़ई

जहाँ शीशा है पत्थर जागते हैं

अहसन यूसुफ़ ज़ई

घर घर आपस में दुश्मनी भी है

अहसन यूसुफ़ ज़ई

काट गई कोहरे की चादर सर्द हवा की तेज़ी माप

अहसन शफ़ीक़

ज़ेहन का सफ़र तन्हा दिल की रहगुज़र तन्हा

अहसन रिज़वी दानापुरी

मआल-ए-सोज़-ए-तलब था दिल-ए-तपाँ मालूम

अहसन रिज़वी दानापुरी

जिधर से वादी-ए-हैरत में हम गुज़रते हैं

अहसन रिज़वी दानापुरी

तमाम उम्र इसी रंज में तमाम हुई

अहसन मारहरवी

शेख़ को जन्नत मुबारक हम को दोज़ख़ है क़ुबूल

अहसन मारहरवी

मुझे ख़बर नहीं ग़म क्या है और ख़ुशी क्या है

अहसन मारहरवी

मौत ही आप के बीमार की क़िस्मत में न थी

अहसन मारहरवी

क्यूँ चुप हैं वो बे-बात समझ में नहीं आता

अहसन मारहरवी

किसी माशूक़ का आशिक़ से ख़फ़ा हो जाना

अहसन मारहरवी

किसी को भेज के ख़त हाए ये कैसा अज़ाब आया

अहसन मारहरवी

हम अपनी बे-क़रारी-ए-दिल से हैं बे-क़रार

अहसन मारहरवी