Sad Poetry (page 322)

इस ज़िंदगी में इतनी फ़राग़त किसे नसीब

अहमद फ़राज़

इस अहद-ए-ज़ुल्म में मैं भी शरीक हूँ जैसे

अहमद फ़राज़

हो दूर इस तरह कि तिरा ग़म जुदा न हो

अहमद फ़राज़

ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो

अहमद फ़राज़

फ़ज़ा उदास है रुत मुज़्महिल है मैं चुप हूँ

अहमद फ़राज़

'फ़राज़' इश्क़ की दुनिया तो ख़ूब-सूरत थी

अहमद फ़राज़

इक ये भी तो अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ है

अहमद फ़राज़

दिल-गिरफ़्ता ही सही बज़्म सजा ली जाए

अहमद फ़राज़

चुप-चाप अपनी आग में जलते रहो 'फ़राज़'

अहमद फ़राज़

अब तिरा ज़िक्र भी शायद ही ग़ज़ल में आए

अहमद फ़राज़

ज़ेर-ए-लब

अहमद फ़राज़

तो बेहतर है यही

अहमद फ़राज़

तसलसुल

अहमद फ़राज़

तख़्लीक़

अहमद फ़राज़

सवाल

अहमद फ़राज़

सफ़ेद छड़ियाँ

अहमद फ़राज़

पहली आवाज़

अहमद फ़राज़

नामा-ए-जानाँ

अहमद फ़राज़

मुझ से पहले

अहमद फ़राज़

मुहासरा

अहमद फ़राज़

मयूरका

अहमद फ़राज़

ख़्वाबों के ब्योपारी

अहमद फ़राज़

कर गए कूच कहाँ

अहमद फ़राज़

काली दीवार

अहमद फ़राज़

ईद-कार्ड

अहमद फ़राज़

हच-हाईकर

अहमद फ़राज़

हमदर्द

अहमद फ़राज़

दोस्ती का हाथ

अहमद फ़राज़

भली सी एक शक्ल थी

अहमद फ़राज़

बन-बास की एक शाम

अहमद फ़राज़