Couplets Poetry (page 15)

आप को ख़ून के आँसू ही रुलाना होगा

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

दस्त-ए-तलब दराज़ ज़ियादा न कर सके

ज़ैन रामिश

तू बेवफ़ा है तिरा ए'तिबार कौन करे

ज़ैग़म हमीदी

रख दिया ख़ल्क़ ने नाम उस का क़यामत ऐ 'ज़ेब'

ज़ेब उस्मानिया

ज़िंदगी तू ने तो सच है कि वफ़ा हम से न की

ज़ाहिदा ज़ैदी

मुड़ के देखा तो हमें छोड़ के जाती थी हयात

ज़ाहिदा ज़ैदी

ख़्वाब तो ख़्वाब हैं पल भर में बिखर जाते हैं

ज़ाहिदा ज़ैदी

कभी इश्क़ साज़-ए-हयात था कभी सोज़-ए-दिल ने जला दिया

ज़ाहिदा ज़ैदी

हमीं से अंजुमन-ए-इश्क़ मो'तबर ठहरी

ज़ाहिदा ज़ैदी

शामिल न होते हुस्न के जल्वे अगर 'कमाल'

ज़ाहीदा कमाल

कहना पड़ा उन्हीं को मसीहा-ए-वक़्त भी

ज़ाहीदा कमाल

जब तक तुम्हारा हुस्न नुमायाँ न हो सका

ज़ाहीदा कमाल

अफ़्साना-ए-हयात बनी फूल बन गई

ज़ाहीदा कमाल

क्या वफ़ा ओ जफ़ा की बात करें

ज़ाहीदा हिना

तुम हब्स के मौसम को ज़रा और बढ़ा लो

ज़ाहिद मसूद

शब-ए-व'अदा फ़सील-ए-हिज्र से आगे चमकता है तिरा इस्म-ए-सितारा-जू

ज़ाहिद मसूद

उठाना ख़ुद ही पड़ता है थका टूटा बदन 'फ़ख़री'

ज़ाहिद फख़री

रात है सर पर कोई सूरज नहीं

ज़ाहिद फख़री

ज़र्रे ज़र्रे में बिखर जाना है तकमील-ए-हयात

ज़हीर सिद्दीक़ी

उस के अल्फ़ाज़-ए-तसल्ली ने रुलाया मुझ को

ज़हीर सिद्दीक़ी

न जाने हम से गिला क्यूँ है तिश्ना-कामों को

ज़हीर सिद्दीक़ी

जैसे जैसे आगही बढ़ती गई वैसे 'ज़हीर'

ज़हीर सिद्दीक़ी

इतने चेहरों में मुझे है एक चेहरे की तलाश

ज़हीर सिद्दीक़ी

दर्द तो ज़ख़्म की पट्टी के हटाने से उठा

ज़हीर सिद्दीक़ी

ज़र्द चेहरे को बड़े शौक़ से सब देखते हैं

ज़हीर रहमती

ज़माने भर को है उम्मीद उसी से

ज़हीर रहमती

यूँ ही हम दर्द अपना खो रहे हैं

ज़हीर रहमती

सतही लोगों में गहराई होती है

ज़हीर रहमती

सदियों में कोई एक मोहब्बत होती है

ज़हीर रहमती

कुछ न होते होते इक दिन ये हुआ

ज़हीर रहमती