Couplets Poetry (page 344)
मिलते हैं इस अदा से कि गोया ख़फ़ा नहीं
हसरत मोहानी
मानूस हो चला था तसल्ली से हाल-ए-दिल
हसरत मोहानी
मालूम सब है पूछते हो फिर भी मुद्दआ'
हसरत मोहानी
कोशिशें हम ने कीं हज़ार मगर
हसरत मोहानी
ख़ूब-रूयों से यारियाँ न गईं
हसरत मोहानी
खींच लेना वो मिरा पर्दे का कोना दफ़अतन
हसरत मोहानी
ख़ंदा-ए-अहल-ए-जहाँ की मुझे पर्वा क्या है
हसरत मोहानी
कट गई एहतियात-ए-इश्क़ में उम्र
हसरत मोहानी
कहाँ हम कहाँ वस्ल-ए-जानाँ की 'हसरत'
हसरत मोहानी
कभी की थी जो अब वफ़ा कीजिएगा
हसरत मोहानी
जो और कुछ हो तिरी दीद के सिवा मंज़ूर
हसरत मोहानी
जबीं पर सादगी नीची निगाहें बात में नरमी
हसरत मोहानी
इक़रार है कि दिल से तुम्हें चाहते हैं हम
हसरत मोहानी
इल्तिफ़ात-ए-यार था इक ख़्वाब-ए-आग़ाज़-ए-वफ़ा
हसरत मोहानी
हम क्या करें अगर न तिरी आरज़ू करें
हसरत मोहानी
हम जौर-परस्तों पे गुमाँ तर्क-ए-वफ़ा का
हसरत मोहानी
'हसरत' की भी क़ुबूल हो मथुरा में हाज़िरी
हसरत मोहानी
'हसरत' जो सुन रहे हैं वो अहल-ए-वफ़ा का हाल
हसरत मोहानी
'हसरत' बहुत है मर्तबा-ए-आशिक़ी बुलंद
हसरत मोहानी
हक़ीक़त खुल गई 'हसरत' तिरे तर्क-ए-मोहब्बत की
हसरत मोहानी
है वहाँ शान-ए-तग़ाफ़ुल को जफ़ा से भी गुरेज़
हसरत मोहानी
है मश्क़-ए-सुख़न जारी चक्की की मशक़्क़त भी
हसरत मोहानी
है इंतिहा-ए-यास भी इक इब्तिदा-ए-शौक़
हसरत मोहानी
गुज़रे बहुत उस्ताद मगर रंग-ए-असर में
हसरत मोहानी
ग़ुर्बत की सुब्ह में भी नहीं है वो रौशनी
हसरत मोहानी
ग़म-ए-आरज़ू का 'हसरत' सबब और क्या बताऊँ
हसरत मोहानी
ग़ैर की नज़रों से बच कर सब की मर्ज़ी के ख़िलाफ़
हसरत मोहानी
दोपहर की धूप में मेरे बुलाने के लिए
हसरत मोहानी
दिलों को फ़िक्र-ए-दो-आलम से कर दिया आज़ाद
हसरत मोहानी
दिल को ख़याल-ए-यार ने मख़्मूर कर दिया
हसरत मोहानी