Couplets Poetry (page 345)
देखने आए थे वो अपनी मोहब्बत का असर
हसरत मोहानी
देखा किए वो मस्त निगाहों से बार बार
हसरत मोहानी
दावा-ए-आशिक़ी है तो 'हसरत' करो निबाह
हसरत मोहानी
चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
हसरत मोहानी
चोरी चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह
हसरत मोहानी
छुप नहीं सकती छुपाने से मोहब्बत की नज़र
हसरत मोहानी
छेड़ा है दस्त-ए-शौक़ ने मुझ से ख़फ़ा हैं वो
हसरत मोहानी
छेड़ नाहक़ न ऐ नसीम-ए-बहार
हसरत मोहानी
भूल ही जाएँ हम को ये तो न हो
हसरत मोहानी
बे-ज़बानी तर्जुमान-ए-शौक़ बेहद हो तो हो
हसरत मोहानी
बरसात के आते ही तौबा न रही बाक़ी
हसरत मोहानी
बर्क़ को अब्र के दामन में छुपा देखा है
हसरत मोहानी
बद-गुमाँ आप हैं क्यूँ आप से शिकवा है किसे
हसरत मोहानी
बाम पर आने लगे वो सामना होने लगा
हसरत मोहानी
अल्लाह-री जिस्म-ए-यार की ख़ूबी कि ख़ुद-ब-ख़ुद
हसरत मोहानी
ऐसे बिगड़े कि फिर जफ़ा भी न की
हसरत मोहानी
ऐ याद-ए-यार देख कि बा-वस्फ़-ए-रंज-ए-हिज्र
हसरत मोहानी
आरज़ू तेरी बरक़रार रहे
हसरत मोहानी
आप को आता रहा मेरे सताने का ख़याल
हसरत मोहानी
आईने में वो देख रहे थे बहार-ए-हुस्न
हसरत मोहानी
ये किस ने कहा है मिरी तक़दीर बना दे
हसरत जयपुरी
किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम
हसरत जयपुरी
ख़ुदा जाने किस किस की ये जान लेगी
हसरत जयपुरी
कहीं वो आ के मिटा दें न इंतिज़ार का लुत्फ़
हसरत जयपुरी
जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूँ नहीं देते
हसरत जयपुरी
हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं
हसरत जयपुरी
दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे
हसरत जयपुरी
ज़ुल्फ़-ए-कलमूँही को प्यारे इतना भी सर मत चढ़ा
हसरत अज़ीमाबादी
ज़ाहिदा किस हुस्न-ए-गंदुम-गूँ पे है तेरी निगाह
हसरत अज़ीमाबादी
उठूँ दहशत से ता महफ़िल से उस की
हसरत अज़ीमाबादी