Couplets Poetry (page 343)

कहीं ख़ुलूस कहीं दोस्ती कहीं पे वफ़ा

हस्तीमल हस्ती

हमें पसंद नहीं जंग में भी मक्कारी

हस्तीमल हस्ती

दिल में जो मोहब्बत की रौशनी नहीं होती

हस्तीमल हस्ती

दिल की हालत पूछने वालो

हस्तीमल हस्ती

बैठते जब हैं खिलौने वो बनाने के लिए

हस्तीमल हस्ती

वस्ल की बनती हैं इन बातों से तदबीरें कहीं

हसरत मोहानी

वाक़िफ़ हैं ख़ूब आप के तर्ज़-ए-जफ़ा से हम

हसरत मोहानी

वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ

हसरत मोहानी

उस ना-ख़ुदा के ज़ुल्म ओ सितम हाए क्या करूँ

हसरत मोहानी

उन को याँ वादे पे आ लेने दे ऐ अब्र-ए-बहार

हसरत मोहानी

तोड़ कर अहद-ए-करम ना-आश्ना हो जाइए

हसरत मोहानी

तेरी महफ़िल से उठाता ग़ैर मुझ को क्या मजाल

हसरत मोहानी

तासीर-ए-बर्क़-ए-हुस्न जो उन के सुख़न में थी

हसरत मोहानी

शिकवा-ए-ग़म तिरे हुज़ूर किया

हसरत मोहानी

शेर मेरे भी हैं पुर-दर्द व-लेकिन 'हसरत'

हसरत मोहानी

शेर दर-अस्ल हैं वही 'हसरत'

हसरत मोहानी

शाम हो या कि सहर याद उन्हीं की रखनी

हसरत मोहानी

सभी कुछ हो चुका उन का हमारा क्या रहा 'हसरत'

हसरत मोहानी

रौशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम

हसरत मोहानी

रानाई-ए-ख़याल को ठहरा दिया गुनाह

हसरत मोहानी

राह में मिलिए कभी मुझ से तो अज़-राह-ए-सितम

हसरत मोहानी

रात दिन नामा-ओ-पैग़ाम कहाँ तक दोगे

हसरत मोहानी

पुर्सिश-ए-हाल पे है ख़ातिर-ए-जानाँ माइल

हसरत मोहानी

फिर और तग़ाफ़ुल का सबब क्या है ख़ुदाया

हसरत मोहानी

पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ था

हसरत मोहानी

पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ था

हसरत मोहानी

नहीं आती तो याद उन की महीनों तक नहीं आती

हसरत मोहानी

मुनहसिर वक़्त-ए-मुक़र्रर पे मुलाक़ात हुई

हसरत मोहानी

मुझ से तन्हाई में गर मिलिए तो दीजे गालियाँ

हसरत मोहानी

मुझ को देखो मिरे मरने की तमन्ना देखो

हसरत मोहानी