Couplets Poetry (page 341)
हमें उजाल दे फिर देख अपने जल्वों को
हयात वारसी
है इख़्तियार हमें काएनात पर हासिल
हयात वारसी
दूसरों के वास्ते जीते रहे मरते रहे
हयात रिज़वी अमरोहवी
ये जज़्बा-ए-तलब तो मिरा मर न जाएगा
हयात लखनवी
ये इल्तिजा दुआ ये तमन्ना फ़ुज़ूल है
हयात लखनवी
सिलसिला ख़्वाबों का सब यूँही धरा रह जाएगा
हयात लखनवी
मुद्दआ हम अपना काग़ज़ पर रक़म कर जाएँगे
हयात लखनवी
हर सदा से बच के वो एहसास-ए-तन्हाई में है
हयात लखनवी
चेहरे को तेरे देख के ख़ामोश हो गया
हयात लखनवी
अब दिलों में कोई गुंजाइश नहीं मिलती 'हयात'
हयात लखनवी
रहें ग़म की शरर-अंगेज़ियाँ या-रब क़यामत तक
हया लखनवी
निगाह-ए-शौक़ अगर दिल की तर्जुमाँ हो जाए
हया लखनवी
चमन वही है घटाएँ वही बहार वही
हया लखनवी
आह ये बरसात का मौसम ये ज़ख़्मों की बहार
हया लखनवी
सैंडिलों और झाड़ूओं से रोज़ मुझ को झाड़ना
हातिम भट्टी
ज़बाँ से बात निकली और पराई हो गई सच है
हातिम अली मेहर
याद रखने की ये बातें हैं बजा है सच है
हातिम अली मेहर
याद में इक शोख़ पंजाबी के रोते हैं जो हम
हातिम अली मेहर
वहदहू-ला-शरीक की है क़सम
हातिम अली मेहर
तू ने वहदत को कर दिया कसरत
हातिम अली मेहर
तिरी तलाश से बाक़ी कोई मकाँ न रहा
हातिम अली मेहर
सारी इज़्ज़त नौकरी से इस ज़माने में है 'मेहर'
हातिम अली मेहर
सबा जो बड़ी बाग़ वाली हुई है
हातिम अली मेहर
रातों को बुत बग़ल में हैं क़ुरआँ तमाम दिन
हातिम अली मेहर
रात दिन सज्दे किया करता है हूरों के लिए
हातिम अली मेहर
न ज़क़न है वो न लब हैं न वो पिस्ताँ न वो क़द
हातिम अली मेहर
न ले जा दैर से का'बा हमें ज़ाहिद कि हम वाँ भी
हातिम अली मेहर
मार डाला तिरी आँखों ने हमें
हातिम अली मेहर
मजमा' में रक़ीबों के खुला था तिरा जूड़ा
हातिम अली मेहर
क्या बुतों में है ख़ुदा जाने ब-क़ौल-ए-उस्ताद
हातिम अली मेहर