Couplets Poetry (page 342)
कू-ए-क़ातिल में बसेगी नई दुनिया इक और
हातिम अली मेहर
कूचे में जो उस शोख़-हसीं के न रहेंगे
हातिम अली मेहर
किस पर नहीं रही है इनायत हुज़ूर की
हातिम अली मेहर
किधर का चाँद हुआ 'मेहर' के जो घर आए
हातिम अली मेहर
ख़ूब-रूई पे है क्या नाज़ बुतान-ए-लंदन
हातिम अली मेहर
करते हैं शौक़-ए-दीद में बातें हवा से हम
हातिम अली मेहर
काफ़िर-ए-इश्क़ हूँ मुश्ताक़-ए-शहादत भी हूँ
हातिम अली मेहर
जवाँ रखती है मय देखे अजब तासीर पानी में
हातिम अली मेहर
जन्नत की ने'मतों का मज़ा वाइ'ज़ों को हो
हातिम अली मेहर
हम 'मेहर' मोहब्बत से बहुत तंग हैं अब तो
हातिम अली मेहर
हम भी बातें बनाया करते हैं
हातिम अली मेहर
गुलज़ार में फिर कोई गुल-ए-ताज़ा खिला क्या
हातिम अली मेहर
गुल बाँग थी गुलों की हमारा तराना था
हातिम अली मेहर
फ़स्ल-ए-गुल आई तो क्या बे-सर-ओ-सामाँ हैं हम
हातिम अली मेहर
दोनों उसी के बंदे हैं यकता है वो करीम
हातिम अली मेहर
दीवाना हूँ पर काम में होशियार हूँ अपने
हातिम अली मेहर
दर-ब-दर मारा-फिरा मैं जुस्तुजू-ए-यार में
हातिम अली मेहर
बोसे लेते हैं चश्म-ए-जानाँ के
हातिम अली मेहर
बे-क़रारी रोज़-ओ-शब करने लगा
हातिम अली मेहर
अपना बातिन ख़ूब है ज़ाहिर से भी ऐ जान-ए-जाँ
हातिम अली मेहर
ऐन-ए-का'बा में है मस्तों की जगह
हातिम अली मेहर
ये तजरबा हुआ है मोहब्बत की राह में
हस्तीमल हस्ती
वो जो क़िस्से में था शामिल वही कहता है मुझे
हस्तीमल हस्ती
तेरी बीनाई किसी दिन छीन लेगा देखना
हस्तीमल हस्ती
प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
हस्तीमल हस्ती
मुझ से जल्दी हार कर मेरा हरीफ़
हस्तीमल हस्ती
लुत्फ़ आराम का तू क्या जाने
हस्तीमल हस्ती
कुछ और सबक़ हम को ज़माने ने सिखाए
हस्तीमल हस्ती
ख़ुद चराग़ बन के जल वक़्त के अंधेरे में
हस्तीमल हस्ती
खेल ज़िंदगी के तुम खेलते रहो यारो
हस्तीमल हस्ती