Couplets Poetry (page 340)
याद इतना है मिरे लब पे फ़ुग़ाँ आई थी
हीरा लाल फ़लक देहलवी
वुसअ'त तिलिस्म-ख़ाना-ए-आलम की क्या कहूँ
हीरा लाल फ़लक देहलवी
तन को मिट्टी नफ़स को हवा ले गई
हीरा लाल फ़लक देहलवी
रौशनी तेज़ करो चाँद सितारो अपनी
हीरा लाल फ़लक देहलवी
परतव-ए-हुस्न हूँ इस वास्ते महदूद हूँ मैं
हीरा लाल फ़लक देहलवी
पहुँचो गर इक चाँद पर सौ और आते हैं नज़र
हीरा लाल फ़लक देहलवी
निय्यत अगर ख़राब हुई है हुज़ूर की
हीरा लाल फ़लक देहलवी
नज़रों में हुस्न दिल में तुम्हारा ख़याल है
हीरा लाल फ़लक देहलवी
मिरा ख़त पढ़ लिया उस ने मगर ये तो बता क़ासिद
हीरा लाल फ़लक देहलवी
मक़ाम-ए-बर्क़ जिसे आसमाँ भी कहते हैं
हीरा लाल फ़लक देहलवी
मैं ने अंजाम से पहले न पलट कर देखा
हीरा लाल फ़लक देहलवी
मैं तिरा जल्वा तू मेरा दिल है मेरे हम-नशीं
हीरा लाल फ़लक देहलवी
लोग अंदाज़ा लगाएँगे अमल से मेरे
हीरा लाल फ़लक देहलवी
क्या बात है नज़रों से अंधेरा नहीं जाता
हीरा लाल फ़लक देहलवी
हम तो मंज़िल के तलबगार थे लेकिन मंज़िल
हीरा लाल फ़लक देहलवी
हाल बीमार का पूछो तो शिफ़ा मिलती है
हीरा लाल फ़लक देहलवी
देखूँगा किस क़दर तिरी रहमत में जोश है
हीरा लाल फ़लक देहलवी
चराग़-ए-इल्म रौशन-दिल है तेरा
हीरा लाल फ़लक देहलवी
अपना घर फिर अपना घर है अपने घर की बात क्या
हीरा लाल फ़लक देहलवी
ऐ शाम-ए-ग़म की गहरी ख़मोशी तुझे सलाम
हीरा लाल फ़लक देहलवी
अब कहे जाओ फ़साने मिरी ग़र्क़ाबी के
हीरा लाल फ़लक देहलवी
उतर के नीचे कभी मेरे साथ भी तो चलो
हज़ीं लुधियानवी
तुंदी-ए-सैल-ए-वक़्त में ये भी है कोई ज़िंदगी
हज़ीं लुधियानवी
तुलूअ होगा अभी कोई आफ़्ताब ज़रूर
हज़ीं लुधियानवी
नज़र न आई कभी फिर वो गाँव की गोरी
हज़ीं लुधियानवी
जो पा लिया तुझे मैं ख़ुद को ढूँडने निकला
हज़ीं लुधियानवी
आओ मिल बैठ कर हँसें बोलें
हज़ीं लुधियानवी
हो के अफ़्सुर्दा मिरी शूमी-ए-तक़दीर न देख
हज़ार लखनवी
दिल की धड़कन मिरे माथे की शिकन है कि नहीं
हज़ार लखनवी
देखने वाले ज़माने का भी हक़ है मुझ पर
हज़ार लखनवी