Couplets Poetry (page 492)

रस्ते की अंजान ख़ुशी है

अासिफ़ साक़िब

क़ैदी रिहा हुए थे पहन कर नए लिबास

अासिफ़ साक़िब

लकीर खींच के मुझ पे वो फिर मुझे देखे

अासिफ़ साक़िब

किस दर्जा मुनाफ़िक़ हैं सब अहल-ए-हवस 'साक़िब'

अासिफ़ साक़िब

दिल की मौजों की तड़प मेरी सदा में आए

अासिफ़ साक़िब

ये मिरी बज़्म नहीं है लेकिन

आसिफ़ रज़ा

ये दिल में वसवसा क्या पल रहा है

आसिफ़ रज़ा

तेरा मेरा है गुमाँ का रिश्ता

आसिफ़ रज़ा

ता-कि न निगाहों को अंधेरे नज़र आएँ

आसिफ़ रज़ा

सिर्फ़ मैं अपनी कहानी ही नहीं

आसिफ़ रज़ा

जतन तो ख़ूब किए उस ने टालने के मगर

आसिफ़ रज़ा

भूल बैठा हूँ मैं ज़माने को

आसिफ़ रज़ा

अजनबी मुझ से आ गले मिल ले

आसिफ़ रज़ा

आँसुओं को फ़ुज़ूल मत समझो

आसिफ़ रज़ा

हवा के लम्स में उस की महक भी होती है

अशरफ़ यूसुफ़

एक तस्वीर हूँ ग़म की जिस पर

अशरफ़ यूसुफ़

तिरे बदन के नए ज़ाविए बनाता हुआ

अशरफ़ सलीम

उतनी ही निगाहों की मिरी प्यास बढ़ी है

अशरफ़ रफ़ी

फ़लक से रोज़ उतरते हैं रौशनी के ख़ुतूत

अशरफ़ जावेद

बसीत-ए-दश्त की हुर्मत को बाम-ओ-दर दे दे

अशरफ़ जावेद

अब तो चलना है किसी और ही रफ़्तार के साथ

अशरफ़ जावेद

मुझ से जो पूछते हो तो हर हाल शुक्र है

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

मेरी तरफ़ से ख़ातिर-ए-सय्याद जमा है

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

कब दर्द से दिल को ताब आया

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

जुगनू मियाँ की दुम जो चमकती है रात को

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

दिल-बस्तगी क़फ़स से यहाँ तक हुई मुझे

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

ऐ शैख़ अगर कुफ़्र से इस्लाम जुदा है

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

बात वो जो कभी हुई ही नहीं

अशरफ़ नक़वी

दुआएँ कीजिए ग़ुंचों के मुस्कुराने की

अशोक साहनी साहिल

ज़माने ने लगाईं मुझ पे लाखों बंदिशें लेकिन

अशोक साहनी