Couplets Poetry (page 493)

तिरी सूरत से हसीं और भी मिल जाएँगे

अशोक साहनी

उर्दू के चंद लफ़्ज़ हैं जब से ज़बान पर

अशोक साहिल

दिल की बस्ती में उजाला ही उजाला होता

अशोक साहिल

इक दिन वो मिल गए थे सर-ए-रहगुज़र कहीं

अश्क रामपुरी

बात में बात उसी की है सुनो तुम जिस की

अश्क रामपुरी

बहुत ख़ामोश रह कर जो सदाएँ मुझ को देता था

आशिर वकील राव

ज़िंदगी की हक़ीक़त अजब हो गई

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

याद रखना भी इक इबादत है

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

तमाम दिन की मशक़्क़त-भरी तकान के ब'अद

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

सवेरा ले के आता है मिरे ख़्वाबों की ताबीरें

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

होश-ओ-हवास खोने लगा हूँ फ़िराक़ में

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

इक लफ़्ज़ याद था मुझे तर्क-ए-वफ़ा मगर

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

आओ तो मेरे सहन में हो जाए रौशनी

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

आज भी नक़्श हैं दिल पर तिरी आहट के निशाँ

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

हम से पूछो मिज़ाज बारिश का

अशफ़ाक़ अंजुम

वो शख़्स जिस की ख़ुशी का बाइस थीं मेरी बातें

अशफ़ाक़ नासिर

वो फूल हो सितारा हो शबनम हो झील हो

अशफ़ाक़ नासिर

वो जिस में लौट के आती थी एक शहज़ादी

अशफ़ाक़ नासिर

शाम होती है तो लगता है कोई रूठ गया

अशफ़ाक़ नासिर

शाम ढलने से फ़क़त शाम नहीं ढलती है

अशफ़ाक़ नासिर

जा तुझे तेरे हवाले कर दिया

अशफ़ाक़ नासिर

हम फ़क़त तेरी गुफ़्तुगू में नहीं

अशफ़ाक़ नासिर

हम आइने में तिरा अक्स देखने के लिए

अशफ़ाक़ नासिर

हिज्र इंसाँ के ख़द-ओ-ख़ाल बदल देता है

अशफ़ाक़ नासिर

ऐ जुनूँ उस की कहानी भी सुनाऊँगा तुझे

अशफ़ाक़ नासिर

वो हो न सका अपना तो हम हो गए उस के

अशफ़ाक़ हुसैन

टूटे हुए लोग हैं सलामत

अशफ़ाक़ हुसैन

तुम्हें मनाने का मुझ को ख़याल क्या आए

अशफ़ाक़ हुसैन

तलाश अपनी ख़ुद अपने वजूद को खो कर

अशफ़ाक़ हुसैन

फूल महकेंगे यूँही चाँद यूँही चमकेगा

अशफ़ाक़ हुसैन