Couplets Poetry (page 494)

मैं अपनी प्यास में खोया रहा ख़बर न हुई

अशफ़ाक़ हुसैन

लफ़्ज़ों में हर इक रंज समोने का क़रीना

अशफ़ाक़ हुसैन

खुल कर तो वो मुझ से कभी मिलता ही नहीं है

अशफ़ाक़ हुसैन

कौन हैं वो जिन्हें आफ़ाक़ की वुसअत कम है

अशफ़ाक़ हुसैन

काम जो उम्र-ए-रवाँ का है उसे करने दे

अशफ़ाक़ हुसैन

जो ख़्वाब की दहलीज़ तलक भी नहीं आया

अशफ़ाक़ हुसैन

दिन भर के झमेलों से बचा लाया था ख़ुद को

अशफ़ाक़ हुसैन

दिल में सौ तीर तराज़ू हुए तब जा के खुला

अशफ़ाक़ हुसैन

दिल की जागीर में मेरा भी कोई हिस्सा रख

अशफ़ाक़ हुसैन

बहुत छोटा सा दिल और इस में इक छोटी सी ख़्वाहिश

अशफ़ाक़ हुसैन

ये रोग लगा है अजब हमें जो जान भी ले कर टला नहीं

अशफ़ाक़ आमिर

ये रात ऐसी हवाएँ कहाँ से लाती है

अशफ़ाक़ आमिर

अपनी ख़ुशी से मुझे तेरी ख़ुशी थी अज़ीज़

अशफ़ाक़ आमिर

अब ए'तिबार पे जी चाहता तो है लेकिन

अशफ़ाक़ आमिर

ज़हर में डूबी हुई परछाइयों का रक़्स है

अशअर नजमी

वो जिन की हिजरतों के आज भी कुछ दाग़ रौशन हैं

अशअर नजमी

तुम भी थे सरशार मैं भी ग़र्क-ए-बहर-ए-रंग-ओ-बू

अशअर नजमी

तेरे बदन की धूप से महरूम कब हुआ

अशअर नजमी

शायद मिरी निगाह में कोई शिगाफ़ था

अशअर नजमी

सौंपोगे अपने बा'द विरासत में क्या मुझे

अशअर नजमी

सरों के बोझ को शानों पे रखना मोजज़ा भी है

अशअर नजमी

रस्ते फ़रार के सभी मसदूद तो न थे

अशअर नजमी

रफ़्ता रफ़्ता ख़त्म क़िस्सा हो गया होना ही था

अशअर नजमी

ना-तमामी के शरर में रोज़ ओ शब जलते रहे

अशअर नजमी

न जाने कब कोई आ कर मिरी तकमील कर जाए

अशअर नजमी

मैं ने भी परछाइयों के शहर की फिर राह ली

अशअर नजमी

कैनवस पर है ये किस का पैकर-ए-हर्फ़-ओ-सदा

अशअर नजमी

बहुत मोहतात हो कर साँस लेना मो'तबर हो तुम

अशअर नजमी

अंधेरे में तजस्सुस का तक़ाज़ा छोड़ जाना है

अशअर नजमी

ज़िंदगी करना वो मुश्किल फ़न है 'अशहर' हाशमी

अशहर हाशमी