Couplets Poetry (page 540)
'अत्तार' हो 'रूमी' हो 'राज़ी' हो 'ग़ज़ाली' हो
अल्लामा इक़बाल
अक़्ल को तन्क़ीद से फ़ुर्सत नहीं
अल्लामा इक़बाल
अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी
अल्लामा इक़बाल
अनोखी वज़्अ' है सारे ज़माने से निराले हैं
अल्लामा इक़बाल
अंदाज़-ए-बयाँ गरचे बहुत शोख़ नहीं है
अल्लामा इक़बाल
अमल से ज़िंदगी बनती है जन्नत भी जहन्नम भी
अल्लामा इक़बाल
ऐ ताइर-ए-लाहूती उस रिज़्क़ से मौत अच्छी
अल्लामा इक़बाल
अगर हंगामा-हा-ए-शौक़ से है ला-मकाँ ख़ाली
अल्लामा इक़बाल
अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल
अल्लामा इक़बाल
आँख जो कुछ देखती है लब पे आ सकता नहीं
अल्लामा इक़बाल
आईन-ए-जवाँ-मर्दां हक़-गोई ओ बे-बाकी
अल्लामा इक़बाल
मेरा वजूद जज़्ब हुआ तेरे जिस्म में
अलीउद्दीन नवेद
सदाओं के जंगल में वो ख़ामुशी है
अलीमुल्लाह हाली
कोई पत्थर का निशाँ रख के जुदा हों हम तुम
अलीमुल्लाह हाली
एक आवाज़ ने तोड़ी है ख़मोशी मेरी
अलीमुल्लाह हाली
बिखर के छूट न जाऊँ तिरी गिरफ़्त से मैं
अलीमुल्लाह हाली
यार के दरसन के ख़ातिर जान और तन भूल जा
अलीमुल्लाह
तर्क दे इस्लाम को और कुफ़्र सारा दूर कर
अलीमुल्लाह
तालाब इरादे का भरे पल में लबालब
अलीमुल्लाह
इश्क़ के कूचे में जब जाता है दिल करने को सैर
अलीमुल्लाह
चमन सूँ दिल के आलम को ख़बर नहिं
अलीमुल्लाह
अजब कुछ इश्क़ की ख़ुश-तर है वादी
अलीमुल्लाह
लोग मोहतात हैं रवय्यों में
अली ज़ुबैर
दिल का छूना था कि जज़्बात हुए पत्थर के
अली ज़ुबैर
सुकूत-ए-शाम का हिस्सा तू मत बना मुझ को
अली ज़रयून
बात भी कीजिए देख भी लीजिए
अली ज़रयून
अस्र के वक़्त मेरे पास न बैठ
अली ज़रयून
अदा-ए-इश्क़ हूँ पूरी अना के साथ हूँ मैं
अली ज़रयून
ज़रा पर्दा हटा दो सामने से बिजलियाँ चमकें
अली ज़हीर लखनवी
वो तो था आदमी की तरह 'ज़हीर'
अली ज़हीर लखनवी