Couplets Poetry (page 542)
नज़्ज़ारा-ए-जमाल की फ़ुर्सत कहाँ मिली
अली जव्वाद ज़ैदी
मुद्दतों से ख़लिश जो थी जैसे वो कम सी हो चली
अली जव्वाद ज़ैदी
मोनिस-ए-शब रफ़ीक़-ए-तन्हाई
अली जव्वाद ज़ैदी
मिरे हाथ सुलझा ही लेंगे किसी दिन
अली जव्वाद ज़ैदी
लज़्ज़त-ए-दर्द मिली इशरत-ए-एहसास मिली
अली जव्वाद ज़ैदी
जिन हौसलों से मेरा जुनूँ मुतमइन न था
अली जव्वाद ज़ैदी
जब कभी देखा है ऐ 'ज़ैदी' निगाह-ए-ग़ौर से
अली जव्वाद ज़ैदी
जब छेड़ती हैं उन को गुमनाम आरज़ुएँ
अली जव्वाद ज़ैदी
हम अहल-ए-दिल ने मेयार-ए-मोहब्बत भी बदल डाले
अली जव्वाद ज़ैदी
हिज्र की रात ये हर डूबते तारे ने कहा
अली जव्वाद ज़ैदी
हैं वजूद-ए-शय में पिन्हाँ अज़ल ओ अबद के रिश्ते
अली जव्वाद ज़ैदी
हार के भी नहीं मिटी दिल से ख़लिश हयात की
अली जव्वाद ज़ैदी
गुफ़्तुगू के ख़त्म हो जाने पर आया ये ख़याल
अली जव्वाद ज़ैदी
ग़ज़ब हुआ कि इन आँखों में अश्क भर आए
अली जव्वाद ज़ैदी
एक तुम्हारी याद ने लाख दिए जलाए हैं
अली जव्वाद ज़ैदी
दिल में जो दर्द है वो निगाहों से है अयाँ
अली जव्वाद ज़ैदी
दिल का लहू निगाह से टपका है बार-हा
अली जव्वाद ज़ैदी
दिखा दी मैं ने वो मंज़िल जो इन दोनों के आगे है
अली जव्वाद ज़ैदी
दयार-ए-सज्दा में तक़लीद का रिवाज भी है
अली जव्वाद ज़ैदी
ऐश ही ऐश है न सब ग़म है
अली जव्वाद ज़ैदी
अब न वो शोरिश-ए-रफ़्तार न वो जोश-ए-जुनूँ
अली जव्वाद ज़ैदी
अब दर्द में वो कैफ़ियत-ए-दर्द नहीं है
अली जव्वाद ज़ैदी
आँखों में लिए जल्वा-ए-नैरंग-ए-तमाशा
अली जव्वाद ज़ैदी
तुम किसी संग पे अब सर को टिका कर सो जाओ
अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री
नींद आती है मगर जाग रहा हूँ सर-ए-ख़्वाब
अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री
किसी की आँख का तारा हुआ करते थे हम भी तो
अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री
अव्वलीं चाल से आगे नहीं सोचा मैं ने
अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री
तुम ने हर ज़र्रे में बरपा कर दिया तूफ़ान-ए-शौक़
अली अख़्तर अख़्तर
मुझी को पर्दा-ए-हस्ती में दे रहा है फ़रेब
अली अख़्तर अख़्तर
गुफ़्तुगू-ए-सूरत-ओ-म'अनी है उनवान-ए-हयात
अली अख़्तर अख़्तर