Couplets Poetry (page 541)

राज़-ए-ग़म-ए-उल्फ़त को ये दुनिया न समझ ले

अली ज़हीर लखनवी

नफ़रत से मोहब्बत को सहारे भी मिले हैं

अली ज़हीर लखनवी

मिरा ख़ून-ए-जिगर पुर-नूर बन जाए तो अच्छा हो

अली ज़हीर लखनवी

कान सुनते तो हैं लेकिन न समझने के लिए

अली ज़हीर लखनवी

हमारी ज़िंदगी क्या है मोहब्बत ही मोहब्बत है

अली ज़हीर लखनवी

रिज़्क़ जैसा है मुक़द्दर में लिखा होता है

अली यासिर

ये तेरा गुलिस्ताँ तेरा चमन कब मेरी नवा के क़ाबिल है

अली सरदार जाफ़री

ये मय-कदा है यहाँ हैं गुनाह जाम-ब-दस्त

अली सरदार जाफ़री

ये किस ने फ़ोन पे दी साल-ए-नौ की तहनियत मुझ को

अली सरदार जाफ़री

तू वो बहार जो अपने चमन में आवारा

अली सरदार जाफ़री

शिकायतें भी बहुत हैं हिकायतें भी बहुत

अली सरदार जाफ़री

शब के सन्नाटे में ये किस का लहू गाता है

अली सरदार जाफ़री

सौ मिलीं ज़िंदगी से सौग़ातें

अली सरदार जाफ़री

प्यास जहाँ की एक बयाबाँ तेरी सख़ावत शबनम है

अली सरदार जाफ़री

पुराने साल की ठिठुरी हुई परछाइयाँ सिमटीं

अली सरदार जाफ़री

फूटने वाली है मज़दूर के माथे से किरन

अली सरदार जाफ़री

परतव से जिस के आलम-ए-इम्काँ बहार है

अली सरदार जाफ़री

मक़तल-ए-शौक़ के आदाब निराले हैं बहुत

अली सरदार जाफ़री

कमी कमी सी थी कुछ रंग-ओ-बू-ए-गुलशन में

अली सरदार जाफ़री

काम अब कोई न आएगा बस इक दिल के सिवा

अली सरदार जाफ़री

इसी लिए तो है ज़िंदाँ को जुस्तुजू मेरी

अली सरदार जाफ़री

इसी दुनिया में दिखा दें तुम्हें जन्नत की बहार

अली सरदार जाफ़री

इंक़लाब आएगा रफ़्तार से मायूस न हो

अली सरदार जाफ़री

दिल-ओ-नज़र को अभी तक वो दे रहे हैं फ़रेब

अली सरदार जाफ़री

दामन झटक के वादी-ए-ग़म से गुज़र गया

अली सरदार जाफ़री

बहुत बर्बाद हैं लेकिन सदा-ए-इंक़लाब आए

अली सरदार जाफ़री

रंगों से न रखिए किसी सूरत की तवक़्क़ो

अली मुतहर अशअर

ये दुश्मनी है साक़ी या दोस्ती है साक़ी

अली जव्वाद ज़ैदी

शौक़-ए-मंज़िल हम-सफ़र है जज़्बा-ए-दिल राहबर

अली जव्वाद ज़ैदी

पी तो लूँ आँखों में उमडे हुए आँसू लेकिन

अली जव्वाद ज़ैदी