Couplets Poetry (page 539)

हुई न आम जहाँ में कभी हुकूमत-ए-इश्क़

अल्लामा इक़बाल

हुए मदफ़ून-ए-दरिया ज़ेर-ए-दरिया तैरने वाले

अल्लामा इक़बाल

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है

अल्लामा इक़बाल

हया नहीं है ज़माने की आँख में बाक़ी

अल्लामा इक़बाल

हवा हो ऐसी कि हिन्दोस्ताँ से ऐ 'इक़बाल'

अल्लामा इक़बाल

हरम-ए-पाक भी अल्लाह भी क़ुरआन भी एक

अल्लामा इक़बाल

हर शय मुसाफ़िर हर चीज़ राही

अल्लामा इक़बाल

हाँ दिखा दे ऐ तसव्वुर फिर वो सुब्ह ओ शाम तू

अल्लामा इक़बाल

हकीम ओ आरिफ़ ओ सूफ़ी तमाम मस्त-ए-ज़ुहूर

अल्लामा इक़बाल

हैं उक़्दा-कुशा ये ख़ार-ए-सहरा

अल्लामा इक़बाल

है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़

अल्लामा इक़बाल

गुज़र जा अक़्ल से आगे कि ये नूर

अल्लामा इक़बाल

गुलज़ार-ए-हस्त-ओ-बूद न बेगाना-वार देख

अल्लामा इक़बाल

ग़ुलामी में न काम आती हैं शमशीरें न तदबीरें

अल्लामा इक़बाल

गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कर

अल्लामा इक़बाल

गला तो घोंट दिया अहल-ए-मदरसा ने तिरा

अल्लामा इक़बाल

फ़ितरत को ख़िरद के रू-ब-रू कर

अल्लामा इक़बाल

फ़िर्क़ा-बंदी है कहीं और कहीं ज़ातें हैं

अल्लामा इक़बाल

फ़क़त निगाह से होता है फ़ैसला दिल का

अल्लामा इक़बाल

एक सरमस्ती ओ हैरत है सरापा तारीक

अल्लामा इक़बाल

दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब

अल्लामा इक़बाल

दिल सोज़ से ख़ाली है निगह पाक नहीं है

अल्लामा इक़बाल

दिल से जो बात निकलती है असर रखती है

अल्लामा इक़बाल

ढूँडता फिरता हूँ मैं 'इक़बाल' अपने आप को

अल्लामा इक़बाल

बुतों से तुझ को उमीदें ख़ुदा से नौमीदी

अल्लामा इक़बाल

भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी

अल्लामा इक़बाल

बे-ख़तर कूद पड़ा आतिश-ए-नमरूद में इश्क़

अल्लामा इक़बाल

बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यूँ

अल्लामा इक़बाल

बातिल से दबने वाले ऐ आसमाँ नहीं हम

अल्लामा इक़बाल

अज़ाब-ए-दानिश-ए-हाज़िर से बा-ख़बर हूँ मैं

अल्लामा इक़बाल