Couplets Poetry (page 537)

तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा

अल्लामा इक़बाल

तू क़ादिर ओ आदिल है मगर तेरे जहाँ में

अल्लामा इक़बाल

तू ने ये क्या ग़ज़ब किया मुझ को भी फ़ाश कर दिया

अल्लामा इक़बाल

तू है मुहीत-ए-बे-कराँ मैं हूँ ज़रा सी आबजू

अल्लामा इक़बाल

तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ

अल्लामा इक़बाल

तिरे आज़ाद बंदों की न ये दुनिया न वो दुनिया

अल्लामा इक़बाल

तेरा इमाम बे-हुज़ूर तेरी नमाज़ बे-सुरूर

अल्लामा इक़बाल

तमन्ना दर्द-ए-दिल की हो तो कर ख़िदमत फ़क़ीरों की

अल्लामा इक़बाल

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं

अल्लामा इक़बाल

सितारा क्या मिरी तक़दीर की ख़बर देगा

अल्लामा इक़बाल

सौदा-गरी नहीं ये इबादत ख़ुदा की है

अल्लामा इक़बाल

सौ सौ उमीदें बंधती है इक इक निगाह पर

अल्लामा इक़बाल

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा

अल्लामा इक़बाल

समुंदर से मिले प्यासे को शबनम

अल्लामा इक़बाल

सबक़ मिला है ये मेराज-ए-मुस्तफ़ा से मुझे

अल्लामा इक़बाल

रोज़-ए-हिसाब जब मिरा पेश हो दफ़्तर-ए-अमल

अल्लामा इक़बाल

ऋषी के फ़ाक़ों से टूटा न बरहमन का तिलिस्म

अल्लामा इक़बाल

पुराने हैं ये सितारे फ़लक भी फ़र्सूदा

अल्लामा इक़बाल

पास था नाकामी-ए-सय्याद का ऐ हम-सफ़ीर

अल्लामा इक़बाल

निकल जा अक़्ल से आगे कि ये नूर

अल्लामा इक़बाल

निगाह-ए-इश्क़ दिल-ए-ज़िंदा की तलाश में है

अल्लामा इक़बाल

निगह बुलंद सुख़न दिल-नवाज़ जाँ पुर-सोज़

अल्लामा इक़बाल

नशा पिला के गिराना तो सब को आता है

अल्लामा इक़बाल

नहीं तेरा नशेमन क़स्र-ए-सुल्तानी के गुम्बद पर

अल्लामा इक़बाल

नहीं इस खुली फ़ज़ा में कोई गोशा-ए-फ़राग़त

अल्लामा इक़बाल

नहीं है ना-उमीद 'इक़बाल' अपनी किश्त-ए-वीराँ से

अल्लामा इक़बाल

न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिन्दोस्ताँ वालो

अल्लामा इक़बाल

न पूछो मुझ से लज़्ज़त ख़ानमाँ-बर्बाद रहने की

अल्लामा इक़बाल

मुरीद-ए-सादा तो रो रो के हो गया ताइब

अल्लामा इक़बाल

मुझे रोकेगा तू ऐ नाख़ुदा क्या ग़र्क़ होने से

अल्लामा इक़बाल