Couplets Poetry (page 131)
जाने वाले को चले जाना है
सरवत ज़ेहरा
दिल के दरिया ने किनारों से मोहब्बत कर ली
सरवत ज़ेहरा
बिंत-ए-हव्वा हूँ मैं ये मिरा जुर्म है
सरवत ज़ेहरा
बिंत-ए-हव्वा हूँ मैं ये मिरा जुर्म है
सरवत ज़ेहरा
बस एक बार याद ने तुम्हारा साथ छू लिया
सरवत ज़ेहरा
अब तो सँवारने के लिए हिज्र भी नहीं
सरवत ज़ेहरा
तू ने कब इश्क़ में अच्छा बुरा सोचा 'सरवर'
सरवर आलम राज़
शौक़ है तुझ को ज़माने में तिरा नाम रहे
सरवर आलम राज़
कम-अयारी ने ख़ुदा-सोज़ बनाया ऐसा
सरवर आलम राज़
देख ये जज़्ब-ए-मोहब्बत का करिश्मा तो नहीं
सरवर आलम राज़
बे-कैफ़ जवानी है बे-दर्द ज़माना है
सरवर आलम राज़
बयान क़िस्सा-ए-बेचारगी किया जाए
सरवर आलम राज़
आशिक़ी की ख़ैर हो 'सरवर' कि अब इस शहर में
सरवर आलम राज़
आरज़ू हसरत और उम्मीद शिकायत आँसू
सरवर आलम राज़
आग़ाज़-ए-मोहब्बत से अंजाम-ए-मोहब्बत तक
सरवर आलम राज़
ये कौन उतरा पए-गश्त अपनी मसनद से
सरवत हुसैन
ये जो रौशनी है कलाम में कि बरस रही है तमाम में
सरवत हुसैन
ये इंतिहा-ए-मसर्रत का शहर है 'सरवत'
सरवत हुसैन
उम्र का कोह-ए-गिराँ और शब-ओ-रोज़ मिरे
सरवत हुसैन
तेरी आशुफ़्ता-मिज़ाजी ऐ दिल
सरवत हुसैन
सूरमा जिस के किनारों से पलट आते हैं
सरवत हुसैन
सुब्ह के शहर में इक शोर है शादाबी का
सरवत हुसैन
सोचता हूँ कि उस से बच निकलूँ
सरवत हुसैन
सोचता हूँ दयार-ए-बे-परवा
सरवत हुसैन
सियाही फेरती जाती हैं रातें बहर ओ बर पे
सरवत हुसैन
शहज़ादी तुझे कौन बताए तेरे चराग़-कदे तक
सरवत हुसैन
'सरवत' तुम अपने लोगों से यूँ मिलते हो
सरवत हुसैन
क़िन्दील-ए-मह-ओ-मेहर का अफ़्लाक पे होना
सरवत हुसैन
पाँव साकित हो गए 'सरवत' किसी को देख कर
सरवत हुसैन
नई नई सी आग है या फिर कौन है वो
सरवत हुसैन