Couplets Poetry (page 129)
इश्क़ से तो नहीं हूँ मैं वाक़िफ़
मोहम्मद रफ़ी सौदा
इस कश्मकश से दाम के क्या काम था हमें
मोहम्मद रफ़ी सौदा
हर संग में शरार है तेरे ज़ुहूर का
मोहम्मद रफ़ी सौदा
हर आन आ मुझी को सताते हो नासेहो
मोहम्मद रफ़ी सौदा
है मुद्दतों से ख़ाना-ए-ज़ंजीर बे-सदा
मोहम्मद रफ़ी सौदा
गुल फेंके है औरों की तरफ़ बल्कि समर भी
मोहम्मद रफ़ी सौदा
गिला लिखूँ मैं अगर तेरी बेवफ़ाई का
मोहम्मद रफ़ी सौदा
ग़रज़ कुफ़्र से कुछ न दीं से है मतलब
मोहम्मद रफ़ी सौदा
गर तुझ में है वफ़ा तो जफ़ाकार कौन है
मोहम्मद रफ़ी सौदा
गर हो शराब ओ ख़ल्वत ओ महबूब-ए-ख़ूब-रू
मोहम्मद रफ़ी सौदा
फ़िराक़-ए-ख़ुल्द से गंदुम है सीना-चाक अब तक
मोहम्मद रफ़ी सौदा
फ़िक्र-ए-मआश इश्क़-ए-बुताँ याद-ए-रफ़्तगाँ
मोहम्मद रफ़ी सौदा
दिल मत टपक नज़र से कि पाया न जाएगा
मोहम्मद रफ़ी सौदा
दिल के टुकड़ों को बग़ल-गीर लिए फिरता हूँ
मोहम्मद रफ़ी सौदा
दिखाऊँगा तुझे ज़ाहिद उस आफ़त-ए-दीं को
मोहम्मद रफ़ी सौदा
बे-सबाती ज़माने की नाचार
मोहम्मद रफ़ी सौदा
बदला तिरे सितम का कोई तुझ से क्या करे
मोहम्मद रफ़ी सौदा
बादशाहत दो जहाँ की भी जो होवे मुझ को
मोहम्मद रफ़ी सौदा
अम्मामे को उतार के पढ़ीयो नमाज़ शैख़
मोहम्मद रफ़ी सौदा
अबस तू घर बसाता है मिरी आँखों में ऐ प्यारे
मोहम्मद रफ़ी सौदा
आदम का जिस्म जब कि अनासिर से मिल बना
मोहम्मद रफ़ी सौदा
ये तो दुनिया भी नहीं है कि किनारा कर ले
सऊद उस्मानी
ये मेरी काग़ज़ी कश्ती है और ये मैं हूँ
सऊद उस्मानी
ये जो मैं इतनी सहूलत से तुझे चाहता हूँ
सऊद उस्मानी
यकजाई से पल भर की ख़ुद-आराई भली थी
सऊद उस्मानी
वो चाहता था कि देखे मुझे बिखरते हुए
सऊद उस्मानी
उन से भी मेरी दोस्ती उन से भी रंजिशें
सऊद उस्मानी
तेरी शिकस्त अस्ल में मेरी शिकस्त है
सऊद उस्मानी
तमाम उम्र यहाँ किस का इंतिज़ार हुआ है
सऊद उस्मानी
सूरज के उफ़ुक़ होते हैं मंज़िल नहीं होती
सऊद उस्मानी