Couplets Poetry (page 127)

तो क्या हुआ जो जन्मी थी परदेस में कभी

सय्यदा अरशिया हक़

सब यहाँ 'जौन' के दिवाने हैं

सय्यदा अरशिया हक़

मैं ख़ुद पे ज़ब्त खोती जा रही हूँ

सय्यदा अरशिया हक़

ख़बर कर दे कोई उस बे-ख़बर को

सय्यदा अरशिया हक़

जिस्म को पढ़ते रहे वो रूह तक आए नहीं

सय्यदा अरशिया हक़

हिजाब करने की बंदिश मुझे गवारा नहीं

सय्यदा अरशिया हक़

चमन में न बुलबुल का गूँजे तराना

सय्यदा अरशिया हक़

बला की हुस्न-वर है 'अर्शिया-हक़'

सय्यदा अरशिया हक़

औरत हो तुम तो तुम पे मुनासिब है चुप रहो

सय्यदा अरशिया हक़

'अर्शिया-हक़' के परस्तारों में हो

सय्यदा अरशिया हक़

अपनी सूरत-ए-ज़र्द छुपाती फिरती हूँ

सय्यदा अरशिया हक़

रोज़ इक बात मिरे दिल को सताती है 'ज़िया'

सय्यद ज़िया अल्वी

तमाम उम्र जिसे आब-ए-तल्ख़ से सींचा

सय्यद सफ़ी हसन

क़िस्मत के बाज़ार से बस इक चीज़ ही तो ले सकते थे

सय्यद नसीर शाह

'शहबाज़' में ऐब ही नहीं कुल

सययद मोहम्म्द अब्दुल ग़फ़ूर शहबाज़

शब-ए-फ़िराक़ का छाया हुआ है रोब ऐसा

सययद मोहम्म्द अब्दुल ग़फ़ूर शहबाज़

मिट्टी का ही घर न होगा बर्बाद

सययद मोहम्म्द अब्दुल ग़फ़ूर शहबाज़

ख़ुदा ने मुँह में ज़बान दी है तो शुक्र ये है कि मुँह से बोलो

सययद मोहम्म्द अब्दुल ग़फ़ूर शहबाज़

हम रो रो अश्क बहाते हैं वो तूफ़ाँ बैठे उठाते हैं

सययद मोहम्म्द अब्दुल ग़फ़ूर शहबाज़

दिल तो दिल अफ़ई-ए-गेसू वो बला है काफ़िर

सययद मोहम्म्द अब्दुल ग़फ़ूर शहबाज़

अंजाम ख़ुशी का दुनिया में सच कहते हो ग़म होता है

सययद मोहम्म्द अब्दुल ग़फ़ूर शहबाज़

ज़ालिम न मैं कहा था कि इस ख़ूँ से दरगुज़र

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ज़ाहिद सभी हैं नेमत-ए-हक़ जो है अक्ल-ओ-शर्ब

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ये तो नहीं कहता हूँ कि सच-मुच करो इंसाफ़

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ये रंजिश में हम को है बे-इख़्तियारी

मोहम्मद रफ़ी सौदा

यारो वो शर्म से जो न बोला तो क्या हुआ

मोहम्मद रफ़ी सौदा

वे सूरतें इलाही किस मुल्क बस्तियाँ हैं

मोहम्मद रफ़ी सौदा

तुम कान धर सुनो न सुनो उस के हर्फ़ को

मोहम्मद रफ़ी सौदा

तिरा ख़त आने से दिल को मेरे आराम क्या होगा

मोहम्मद रफ़ी सौदा

'सौदा' तू इस ग़ज़ल को ग़ज़ल-दर-ग़ज़ल ही कह

मोहम्मद रफ़ी सौदा