Couplets Poetry (page 128)

'सौदा' तिरी फ़रियाद से आँखों में कटी रात

मोहम्मद रफ़ी सौदा

'सौदा' की जो बालीं पे गया शोर-ए-क़यामत

मोहम्मद रफ़ी सौदा

'सौदा' ख़ुदा के वास्ते कर क़िस्सा मुख़्तसर

मोहम्मद रफ़ी सौदा

'सौदा' जो तिरा हाल है इतना तो नहीं वो

मोहम्मद रफ़ी सौदा

'सौदा' जो बे-ख़बर है वही याँ करे है ऐश

मोहम्मद रफ़ी सौदा

'सौदा' जहाँ में आ के कोई कुछ न ले गया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

'सौदा' हुए जब आशिक़ क्या पास आबरू का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

साक़ी हमारी तौबा तुझ पर है क्यूँ गवारा

मोहम्मद रफ़ी सौदा

साक़ी गई बहार रही दिल में ये हवस

मोहम्मद रफ़ी सौदा

समझे थे हम जो दोस्त तुझे ऐ मियाँ ग़लत

मोहम्मद रफ़ी सौदा

नौबत-ए-क़ैस हो चुकी आख़िर

मोहम्मद रफ़ी सौदा

नसीम है तिरे कूचे में और सबा भी है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

नहीं है घर कोई ऐसा जहाँ उस को न देखा हो

मोहम्मद रफ़ी सौदा

न कर 'सौदा' तू शिकवा हम से दिल की बे-क़रारी का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

न जिया तेरी चश्म का मारा

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मौज-ए-नसीम आज है आलूदा गर्द से

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मत पूछ ये कि रात कटी क्यूँके तुझ बग़ैर

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मैं ने तुम को दिल दिया और तुम ने मुझे रुस्वा किया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मै-कशाँ रूह हमारी भी कभी शाद करो

मोहम्मद रफ़ी सौदा

क्या ज़िद है मिरे साथ ख़ुदा जाने वगरना

मोहम्मद रफ़ी सौदा

क्या करूँगा ले के वाइज़ हाथ से हूरों के जाम

मोहम्मद रफ़ी सौदा

किसे ताक़त है शरह-ए-शौक़ उस मज्लिस में करने की

मोहम्मद रफ़ी सौदा

किस मुँह से फिर तू आप को कहता है इश्क़-बाज़

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कौन किसी का ग़म खाता है

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कैफ़िय्यत-ए-चश्म उस की मुझे याद है 'सौदा'

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कहते थे हम न देख सकें रोज़-ए-हिज्र को

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कहियो सबा सलाम हमारा बहार से

मोहम्मद रफ़ी सौदा

काम आई कोहकन की मशक़्क़त न इश्क़ में

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जिस रोज़ किसी और पे बेदाद करोगे

मोहम्मद रफ़ी सौदा

जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बाँधे

मोहम्मद रफ़ी सौदा