Couplets Poetry (page 173)
हम ने देखा तरफ़-ए-मय-कदा जाते थे 'रियाज़'
रियाज़ ख़ैराबादी
हम को 'रियाज़' जानते हैं मानते हैं सब
रियाज़ ख़ैराबादी
हम जाम-ए-मय के भी लब तर चूसते नहीं
रियाज़ ख़ैराबादी
हम जानते हैं लुत्फ़-ए-तक़ाज़ा-ए-मय-फ़रोश
रियाज़ ख़ैराबादी
हम बंद किए आँख तसव्वुर में पड़े हैं
रियाज़ ख़ैराबादी
हिन्दोस्ताँ में धूम है किस की ज़बान की
रियाज़ ख़ैराबादी
हाथ रक्खा मैं ने सोते में कहाँ
रियाज़ ख़ैराबादी
हमारी आँखों में आओ तो हम दिखाएँ तुम्हें
रियाज़ ख़ैराबादी
है भी कुछ या नहीं मैं हाथ लगा कर देखूँ
रियाज़ ख़ैराबादी
घर में पहुँचा था कि आई नज्द से आवाज़-ए-क़ैस
रियाज़ ख़ैराबादी
घर में दस हों तो ये रौनक़ नहीं होगी घर में
रियाज़ ख़ैराबादी
ग़म मुझे देते हो औरों की ख़ुशी के वास्ते
रियाज़ ख़ैराबादी
ग़लत है आप न थे हम-कलाम ख़ल्वत में
रियाज़ ख़ैराबादी
एक वाइज़ है कि जिस की दावतों की धूम है
रियाज़ ख़ैराबादी
दिल-जलों से दिल-लगी अच्छी नहीं
रियाज़ ख़ैराबादी
धोके से पिला दी थी उसे भी कोई दो घूँट
रियाज़ ख़ैराबादी
देखिएगा सँभल कर आईना
रियाज़ ख़ैराबादी
दर्द हो तो दवा करे कोई
रियाज़ ख़ैराबादी
डराता है हमें महशर से तू वाइज़ अरे जा भी
रियाज़ ख़ैराबादी
डर है न दुपट्टा कहीं सीने से सरक जाए
रियाज़ ख़ैराबादी
छुपता नहीं छपाने से आलम उभार का
रियाज़ ख़ैराबादी
भर भर के जाम बज़्म में छलकाए जाते हैं
रियाज़ ख़ैराबादी
बहार आते ही फूलों ने छावनी छाई
रियाज़ ख़ैराबादी
बाग़बाँ काम हमें क्या है वो उजड़े कि रहे
रियाज़ ख़ैराबादी
बड़े पाक तीनत बड़े साफ़ बातिन
रियाज़ ख़ैराबादी
बच जाए जवानी में जो दुनिया की हवा से
रियाज़ ख़ैराबादी
अज़ाँ का काम चल जाए जो नाक़ूस-ए-बरहमन से
रियाज़ ख़ैराबादी
अल्लाह-रे नाज़ुकी कि जवाब-ए-सलाम में
रियाज़ ख़ैराबादी
ऐसी ही इंतिज़ार में लज़्ज़त अगर न हो
रियाज़ ख़ैराबादी
अहल-ए-हरम से कह दो कि बिगड़ी नहीं है बात
रियाज़ ख़ैराबादी