Couplets Poetry (page 172)

मेरी सज-धज तो कोई इश्क़-ए-बुताँ में देखे

रियाज़ ख़ैराबादी

मिरे घर मिस्ल तबर्रुक के ये सामाँ निकला

रियाज़ ख़ैराबादी

मेरे घर में ग़ैर के डर से कभी छुप जाइए

रियाज़ ख़ैराबादी

मेरे आग़ोश में यूँही कभी आ जा तू भी

रियाज़ ख़ैराबादी

मेहंदी लगाए बैठे हैं कुछ इस अदा से वो

रियाज़ ख़ैराबादी

मर गया हूँ पे तअ'ल्लुक़ है ये मय-ख़ाने से

रियाज़ ख़ैराबादी

मर गए फिर भी तअल्लुक़ है ये मय-ख़ाने से

रियाज़ ख़ैराबादी

मय-ख़ाने में मज़ार हमारा अगर बना

रियाज़ ख़ैराबादी

मय-ख़ाने में क्यूँ याद-ए-ख़ुदा होती है अक्सर

रियाज़ ख़ैराबादी

लुट गई शब को दो शय जिस को छुपाते थे बहुत

रियाज़ ख़ैराबादी

लब-ए-मय-गूँ का तक़ाज़ा है कि जीना होगा

रियाज़ ख़ैराबादी

क्या शराब-ए-नाब न पस्ती से पाया है उरूज

रियाज़ ख़ैराबादी

क्या मज़ा देती है बिजली की चमक मुझ को 'रियाज़'

रियाज़ ख़ैराबादी

कुछ भी हो 'रियाज़' आँख में आँसू नहीं आते

रियाज़ ख़ैराबादी

कोई मुँह चूम लेगा इस नहीं पर

रियाज़ ख़ैराबादी

किसी का हंस के कहना मौत क्यूँ आने लगी तुम को

रियाज़ ख़ैराबादी

किस किस तरह बुलाए गए मय-कदे में आज

रियाज़ ख़ैराबादी

ख़ुदा के हाथ है बिकना न बिकना मय का ऐ साक़ी

रियाज़ ख़ैराबादी

ख़ुदा आबाद रक्खे मय-कदे को

रियाज़ ख़ैराबादी

कली चमन में खिली तो मुझे ख़याल आया

रियाज़ ख़ैराबादी

कहती है ऐ 'रियाज़' दराज़ी ये रीश की

रियाज़ ख़ैराबादी

कहना किसी का सुब्ह-ए-शब-ए-वस्ल नाज़ से

रियाज़ ख़ैराबादी

कहाँ ये बात हासिल है तिरी मस्जिद को ऐ ज़ाहिद

रियाज़ ख़ैराबादी

कह के मैं दिल की कहानी किस क़दर खोया गया

रियाज़ ख़ैराबादी

जिस दिन से हराम हो गई है

रियाज़ ख़ैराबादी

जाम है तौबा-शिकन तौबा मिरी जाम-शिकन

रियाज़ ख़ैराबादी

इतनी पी है कि ब'अद-ए-तौबा भी

रियाज़ ख़ैराबादी

इस वास्ते कि आव-भगत मय-कदे में हो

रियाज़ ख़ैराबादी

इस से अच्छे दश्त-ए-सहरा इस से अच्छे गर्द-बाद

रियाज़ ख़ैराबादी

इस हज में वो बुत भी साथ होगा

रियाज़ ख़ैराबादी