Couplets Poetry (page 171)

ये कम-बख़्त इक जहान-ए-आरज़ू है

रियाज़ ख़ैराबादी

ये काली काली बोतलें जो हैं शराब की

रियाज़ ख़ैराबादी

वो पूछते हैं शौक़ तुझे है विसाल का

रियाज़ ख़ैराबादी

वो जोबन बहुत सर उठाए हुए हैं

रियाज़ ख़ैराबादी

वो बोले वस्ल की हाँ है तो प्यारी प्यारी रात

रियाज़ ख़ैराबादी

वस्ल की रात के सिवा कोई शाम

रियाज़ ख़ैराबादी

उठवाओ मेज़ से मय-ओ-साग़र 'रियाज़' जल्द

रियाज़ ख़ैराबादी

उठता है एक पाँव तो थमता है एक पाँव

रियाज़ ख़ैराबादी

उन्हीं में से कोई आए तो मयख़ाने में आ जाए

रियाज़ ख़ैराबादी

सुना है 'रियाज़' अपनी दाढ़ी बढ़ा कर

रियाज़ ख़ैराबादी

शोख़ी से हर शगूफ़े के टुकड़े उड़ा दिए

रियाज़ ख़ैराबादी

शेर-ए-तर मेरे छलकते हुए साग़र हैं 'रियाज़'

रियाज़ ख़ैराबादी

शैख़-जी गिर गए थे हौज़ में मयख़ाने के

रियाज़ ख़ैराबादी

सय्याद तिरा घर मुझे जन्नत सही मगर

रियाज़ ख़ैराबादी

रोते जो आए थे रुला के गए

रियाज़ ख़ैराबादी

'रियाज़' तौबा न टूटे न मय-कदा छूटे

रियाज़ ख़ैराबादी

'रियाज़' एहसास-ए-ख़ुद्दारी पे कितनी चोट लगती है

रियाज़ ख़ैराबादी

'रियाज़' आने में है उन के अभी देर

रियाज़ ख़ैराबादी

रंग लाएगा दीदा-ए-पुर-आब

रियाज़ ख़ैराबादी

रहमत से 'रियाज़' उस की थे साथ फ़रिश्ते दो

रियाज़ ख़ैराबादी

क़ुलक़ुल-ए-मीना सदा नाक़ूस की शोर-ए-अज़ाँ

रियाज़ ख़ैराबादी

क़द्र मुझ रिंद की तुझ को नहीं ऐ पीर-ए-मुग़ाँ

रियाज़ ख़ैराबादी

पीरी में 'रियाज़' अब भी जवानी के मज़े हैं

रियाज़ ख़ैराबादी

पी के ऐ वाइज़ नदामत है मुझे

रियाज़ ख़ैराबादी

पाऊँ तो उन हसीनों के मुँह चूम लूँ 'रियाज़'

रियाज़ ख़ैराबादी

पाऊँ तो इन हसीनों का मुँह चूम लूँ 'रियाज़'

रियाज़ ख़ैराबादी

निगह-ए-नाज़ इधर है निगह-ए-शौक़ उधर

रियाज़ ख़ैराबादी

नासेह के सर पर एक लगाई तड़ाक़ से

रियाज़ ख़ैराबादी

नज्द में क्या क़ैस का है उर्स आज

रियाज़ ख़ैराबादी

मुफ़लिसों की ज़िंदगी का ज़िक्र क्या

रियाज़ ख़ैराबादी