Couplets Poetry (page 240)
दूसरा ऐसा कहाँ ऐ दश्त ख़ल्वत का मक़ाम
नातिक़ गुलावठी
दोस्ती किस की रही याद वो किस पर भूला
नातिक़ गुलावठी
ढूँढती है इज़्तिराब-ए-शौक़ की दुनिया मुझे
नातिक़ गुलावठी
ढूँढ तो बुत भी यहीं मिल जाएँगे मर्द-ए-ख़ुदा
नातिक़ गुलावठी
धूम कर रक्खी थी कल रिंदों ने बज़्म-ए-वा'ज़ में
नातिक़ गुलावठी
देख ये बार कभी सर से उतरता ही नहीं
नातिक़ गुलावठी
छोड़ भी देते मोहतसिब हम तो ये शग़्ल-ए-मय-कशी
नातिक़ गुलावठी
चराग़ ले के फिरा ढूँढता हुआ घर घर
नातिक़ गुलावठी
चाल और है दुनिया की हमारा है चलन और
नातिक़ गुलावठी
बुतों के साथ ली दी सी जो याद-अल्लाह बाक़ी है
नातिक़ गुलावठी
बे-ख़ुद-ए-शौक़ हूँ आता है ख़ुदा याद मुझे
नातिक़ गुलावठी
बंदगी कीजिए मगर किस की
नातिक़ गुलावठी
अव्वल अव्वल ख़ूब दौड़ी कश्ती-ए-अहल-ए-हवस
नातिक़ गुलावठी
ऐसे बोहतान लगाए कि ख़ुदा याद आया
नातिक़ गुलावठी
ऐ ज़िंदगी जुनूँ न सही बे-ख़ुदी सही
नातिक़ गुलावठी
ऐ शब-ए-हिज्राँ ज़ियादा पाँव फैलाती है क्यूँ
नातिक़ गुलावठी
ऐ निगाह-ए-मस्त उस का नाम है कैफ़-ए-सुरूर
नातिक़ गुलावठी
ऐ जुनूँ बाइस-ए-बदहाली-ए-सहरा क्या है
नातिक़ गुलावठी
ऐ दिल-ए-शिकवा-संज क्या गुज़री
नातिक़ गुलावठी
ऐ बादा-कश गई है मय-ए-ऐश किस के साथ
नातिक़ गुलावठी
अहल-ए-जुनूँ पे ज़ुल्म है पाबंदी-ए-रुसूम
नातिक़ गुलावठी
अब कहें किस से कि उन से बात करना है गुनाह
नातिक़ गुलावठी
अब कहाँ गुफ़्तुगू मोहब्बत की
नातिक़ गुलावठी
अब जहाँ में बाक़ी है आह से निशाँ अपना
नातिक़ गुलावठी
अब गर्दिश-ए-दौराँ को ले आते हैं क़ाबू में
नातिक़ गुलावठी
आती है याद सुब्ह-ए-मसर्रत की बार बार
नातिक़ गुलावठी
आलम-ए-कौन-ओ-मकाँ नाम है वीराने का
नातिक़ गुलावठी
आख़िर को राहबर ने ठिकाने लगा दिया
नातिक़ गुलावठी
आ उम्र-ए-रफ़्ता हश्र के दम-ख़म भी देख लें
नातिक़ गुलावठी
आ के बज़्म-ए-हस्ती में क्या बताएँ क्या पाया
नातिक़ गुलावठी