Couplets Poetry (page 381)

उस के होने से हुई है अपने होने की ख़बर

ग़ुलाम हुसैन साजिद

तड़प उठी है किसी नगर में क़याम करने से रूह मेरी

ग़ुलाम हुसैन साजिद

सितारा-ए-ख़्वाब से भी बढ़ कर ये कौन बे-मेहर है कि जिस ने

ग़ुलाम हुसैन साजिद

रुका हूँ किस के वहम में मिरे गुमान में नहीं

ग़ुलाम हुसैन साजिद

रास आती ही नहीं जब प्यार की शिद्दत मुझे

ग़ुलाम हुसैन साजिद

रास आई है न आएगी ये दुनिया लेकिन

ग़ुलाम हुसैन साजिद

नशात-ए-इज़हार पर अगरचे रवा नहीं ए'तिबार करना

ग़ुलाम हुसैन साजिद

मिल नहीं पाती ख़ुद अपने-आप से फ़ुर्सत मुझे

ग़ुलाम हुसैन साजिद

मिरी विरासत में जो भी कुछ है वो सब इसी दहर के लिए है

ग़ुलाम हुसैन साजिद

मेरी क़िस्मत है ये आवारा-ख़िरामी 'साजिद'

ग़ुलाम हुसैन साजिद

मिरे मायूस रहने पर अगर वो शादमाँ है

ग़ुलाम हुसैन साजिद

मता-ए-बर्ग-ओ-समर वही है शबाहत-ए-रंग-ओ-बू वही है

ग़ुलाम हुसैन साजिद

मैं रिज़्क़-ए-ख़्वाब हो के भी उसी ख़याल में रहा

ग़ुलाम हुसैन साजिद

मैं हूँ मगर आज उस गली के सभी दरीचे खुले हुए हैं

ग़ुलाम हुसैन साजिद

मैं एक मुद्दत से इस जहाँ का असीर हूँ और सोचता हूँ

ग़ुलाम हुसैन साजिद

लौट जाने की इजाज़त नहीं दूँगा उस को

ग़ुलाम हुसैन साजिद

किसी ने फ़क़्र से अपने ख़ज़ाने भर लिए लेकिन

ग़ुलाम हुसैन साजिद

किसी की याद से दिल का अंधेरा और बढ़ता है

ग़ुलाम हुसैन साजिद

कभी मोहब्बत से बाज़ रहने का ध्यान आए तो सोचता हूँ

ग़ुलाम हुसैन साजिद

जिस क़दर महमेज़ करता हूँ मैं 'साजिद' वक़्त को

ग़ुलाम हुसैन साजिद

जी में आता है कि दुनिया को बदलना चाहिए

ग़ुलाम हुसैन साजिद

इश्क़ पर इख़्तियार है किस का

ग़ुलाम हुसैन साजिद

इश्क़ पर फ़ाएज़ हूँ औरों की तरह लेकिन मुझे

ग़ुलाम हुसैन साजिद

इश्क़ की दस्तरस में कुछ भी नहीं

ग़ुलाम हुसैन साजिद

इस अँधेरे में चराग़-ए-ख़्वाब की ख़्वाहिश नहीं

ग़ुलाम हुसैन साजिद

हम मुसाफ़िर हैं गर्द-ए-सफ़र हैं मगर ऐ शब-ए-हिज्र हम कोई बच्चे नहीं

ग़ुलाम हुसैन साजिद

हिकायत-ए-इश्क़ से भी दिल का इलाज मुमकिन नहीं कि अब भी

ग़ुलाम हुसैन साजिद

एक ख़्वाहिश है जो शायद उम्र भर पूरी न हो

ग़ुलाम हुसैन साजिद

ढूँड लाया हूँ ख़ुशी की छाँव जिस के वास्ते

ग़ुलाम हुसैन साजिद

अगर है इंसान का मुक़द्दर ख़ुद अपनी मिट्टी का रिज़्क़ होना

ग़ुलाम हुसैन साजिद