Couplets Poetry (page 76)
वो ज़ुल्फ़-ए-पुर-शिकन लगती नहीं हात
सिराज औरंगाबादी
वो अजब घड़ी थी मैं जिस घड़ी लिया दर्स नुस्ख़ा-ए-इश्क़ का
सिराज औरंगाबादी
वो आशिक़ी के खेत में साबित क़दम हुआ
सिराज औरंगाबादी
वस्ल के दिन शब-ए-हिज्राँ की हक़ीक़त मत पूछ
सिराज औरंगाबादी
वक़्त है अब नमाज़-ए-मग़रिब का
सिराज औरंगाबादी
तुम्हारी ज़ुल्फ़ का हर तार मोहन
सिराज औरंगाबादी
तुझ ज़ुल्फ़ में दिल ने गुम किया राह
सिराज औरंगाबादी
तिरी अबरू है मेहराब-ए-मोहब्बत
सिराज औरंगाबादी
तिरे सुख़न में ऐ नासेह नहीं है कैफ़िय्यत
सिराज औरंगाबादी
तिरे सलाम के धज देख कर मिरे दिल ने
सिराज औरंगाबादी
ताज़ा रख आब-ए-मेहरबानी सीं
सिराज औरंगाबादी
तकिया-ए-मख़मली सिरहाने रख
सिराज औरंगाबादी
तहक़ीक़ की नज़र सीं आख़िर कूँ हम ने देखा
सिराज औरंगाबादी
सुना है जब सीं तेरे हुस्न का शोर
सिराज औरंगाबादी
'सिराज' इन ख़ूब-रूयों का अजब मैं क़ाएदा देखा
सिराज औरंगाबादी
शोर है बस-कि तुझ मलाहत का
सिराज औरंगाबादी
शह-ए-बे-ख़ुदी ने अता किया मुझे अब लिबास-ए-बरहनगी
सिराज औरंगाबादी
सनम किस बंद सीं पहुँचूँ तिरे पास
सिराज औरंगाबादी
रोज़ा-दारान-ए-जुदाई कूँ ख़म-ए-अबरू-ए-यार
सिराज औरंगाबादी
क़ातिल ने अदा का किया जब वार उछल कर
सिराज औरंगाबादी
पेच खा खा कर हमारी आह में गिर्हें पड़ीं
सिराज औरंगाबादी
पकड़ा हूँ किनारा-ए-जुदाई
सिराज औरंगाबादी
नियाज़-ए-बे-ख़ुदी बेहतर नमाज़-ए-ख़ुद-नुमाई सीं
सिराज औरंगाबादी
नींद सीं खुल गईं मिरी आँखें सो देखा यार कूँ
सिराज औरंगाबादी
नज़र-ए-तग़ाफ़ुल-ए-यार का गिला किस ज़बाँ सीं करूँ बयाँ
सिराज औरंगाबादी
नज़र आता नहीं मुझ कूँ सबब क्या
सिराज औरंगाबादी
नक़्द-ए-दिल-ए-ख़ालिस कूँ मिरी क़ल्ब तूँ मत जान
सिराज औरंगाबादी
नहीं बुझती है प्यास आँसू सीं लेकिन
सिराज औरंगाबादी
नहीं बख़्शी है कैफ़िय्यत नसीहत ख़ुश्क ज़ाहिद की
सिराज औरंगाबादी
न मिले जब तलक विसाल उस का
सिराज औरंगाबादी