Couplets Poetry (page 78)
कभी जो आह के मिसरे कूँ याद करता हूँ
सिराज औरंगाबादी
जुनूँ के शहर में नीं कम-अयार कूँ हुर्मत
सिराज औरंगाबादी
जिस कूँ तुझ ग़म सीं दिल-शिगाफ़ी है
सिराज औरंगाबादी
जिस कूँ पिव के हिज्र का बैराग है
सिराज औरंगाबादी
जीना तड़प तड़प कर मरना सिसक सिसक कर
सिराज औरंगाबादी
जाता है मिरा जान निपट प्यास लगी है
सिराज औरंगाबादी
जब सीं लाया इश्क़ ने फ़ौज-ए-जुनूँ
सिराज औरंगाबादी
जाँ-सिपारी दाग़ कत्था चूना है चश्म-ए-इन्तिज़ार
सिराज औरंगाबादी
इश्क़ का नाम गरचे है मशहूर
सिराज औरंगाबादी
इश्क़ दोनों तरफ़ सूँ होता है
सिराज औरंगाबादी
इश्क़ और अक़्ल में हुई है शर्त
सिराज औरंगाबादी
इस अदब-गाह कूँ तूँ मस्जिद-ए-जामे मत बूझ
सिराज औरंगाबादी
हिरन सब हैं बराती और दिवाना बन का दूल्हा है
सिराज औरंगाबादी
हिज्र की रातों में लाज़िम है बयान-ए-ज़ुल्फ़-ए-यार
सिराज औरंगाबादी
हक़ में उश्शाक़ के क़यामत है
सिराज औरंगाबादी
हमारी बात मोहब्बत सीं तुम जो गोश करो
सिराज औरंगाबादी
हाकिम-ए-इश्क़ ने जब अक़्ल की तक़्सीर सुनी
सिराज औरंगाबादी
ग़ैर तरफ़ क्यूँकि नज़र कर सकूँ
सिराज औरंगाबादी
फ़िदा कर जान अगर जानी यही है
सिराज औरंगाबादी
डूब जाता है मिरा जी जो कहूँ क़िस्सा-ए-दर्द
सिराज औरंगाबादी
डोरे नहीं हैं सुर्ख़ तिरी चश्म-ए-मस्त में
सिराज औरंगाबादी
दो-रंगी ख़ूब नहीं यक-रंग हो जा
सिराज औरंगाबादी
दिल मिरा ज़ुल्फ़ सेती छूट फँसा अबरू में
सिराज औरंगाबादी
दिल में आ राह-ए-चश्म-ए-हैराँ सीं
सिराज औरंगाबादी
दिल ले गया है मुझ कूँ दे उम्मीद-ए-दिल-दही
सिराज औरंगाबादी
देखा है जिस ने यार के रुख़्सार की तरफ़
सिराज औरंगाबादी
दाम-ओ-क़फ़स न चाहिए दिल के शिकार कूँ
सिराज औरंगाबादी
बुत-परस्तों कूँ है ईमान-ए-हक़ीक़ी वस्ल-ए-बुत
सिराज औरंगाबादी
बोलता हूँ जो वो बुलाता है
सिराज औरंगाबादी
बगूला जिन के सर पर चत्र-ए-शाही है ज़मीं मसनद
सिराज औरंगाबादी