Couplets Poetry (page 229)
दिल इस तरह हवा-ए-मोहब्बत में जल गया
नज़्म तबा-तबाई
दर्द-ए-दिल से इश्क़ के बे-पर्दगी होती नहीं
नज़्म तबा-तबाई
बिछड़ के तुझ से मुझे है उमीद मिलने की
नज़्म तबा-तबाई
असीरी में बहार आई है फ़रियाद-ओ-फ़ुग़ाँ कर लें
नज़्म तबा-तबाई
अपनी दुनिया तो बना ली थी रिया-कारों ने
नज़्म तबा-तबाई
न होगा राएगाँ ख़ून-ए-शहीदान-ए-वतन हरगिज़
नाज़िश प्रतापगढ़ी
ख़ुदा ऐ काश 'नाज़िश' जीते-जी वो वक़्त भी लाए
नाज़िश प्रतापगढ़ी
जवानो नज़्र दे दो अपने ख़ून-ए-दिल का हर क़तरा
नाज़िश प्रतापगढ़ी
मुझ से ज़ियादा कौन तमाशा देख सकेगा
नाज़िर वहीद
पसीना मेरी मेहनत का मिरे माथे पे रौशन था
नाज़िर सिद्दीक़ी
कौन अब उस को उजड़ने से बचा सकता है
नज़ीर फ़तेहपूरी
कितनी वीरान है गली दिल की
नाज़िम सुल्तानपूरी
इक़तिज़ा वक़्त का जो चाहे करा ले वर्ना
नाज़िम सुल्तानपूरी
बड़े क़लक़ की बात है कि तुम इसे न पढ़ सके
नाज़िम सुल्तानपूरी
अपनी संजीदा तबीअत पे तो अक्सर 'नाज़िम'
नाज़िम सुल्तानपूरी
शाएरी तो वारदात-ए-क़ल्ब की रूदाद है
नाज़िम बरेलवी
गए मौसम का इक पीला सा पत्ता शाख़ पर रह कर
नाज़िम बरेलवी
अपने अंदाज़-ए-तकल्लुम को बदल दे वर्ना
नाज़िम बरेलवी
'नज़ीर' लोग तो चेहरे बदलते रहते हैं
नज़ीर तबस्सुम
रात से शिकायत क्या बस तुम्हीं से कहना है
नज़ीर सिद्दीक़ी
किसी की मेहरबानी से मोहब्बत मुतमइन क्या हो
नज़ीर सिद्दीक़ी
जो लोग मौत को ज़ालिम क़रार देते हैं
नज़ीर सिद्दीक़ी
जिस दर्जा नेक होने की मिलती रही है दाद
नज़ीर सिद्दीक़ी
हम से शिकायतें बजा हम को भी है मगर गिला
नज़ीर सिद्दीक़ी
और ही वो लोग हैं जिन को है यज़्दाँ की तलाश
नज़ीर सिद्दीक़ी
अभी से वो दामन छुड़ाने लगे हो
नज़ीर सिद्दीक़ी
आए तो दिल था बाग़ बाग़ और गए तो दाग़ दाग़
नज़ीर सिद्दीक़ी
यूँ तुझे देख के चौंक उठती हैं सोई यादें
नज़ीर क़ैसर
उस ने ख़त में भेजे हैं
नज़ीर क़ैसर
उभर रहे हैं कई हाथ शब के पर्दे से
नज़ीर क़ैसर