Couplets Poetry (page 230)

रंग लाई है हसरत-ए-तामीर

नज़ीर क़ैसर

पत्थर होता जाता हूँ

नज़ीर क़ैसर

नया लिबास पहन कर भी

नज़ीर क़ैसर

मैं उसे कैसे जीत सकता हूँ

नज़ीर क़ैसर

कोई मुझ को ढूँढने वाला

नज़ीर क़ैसर

ख़्वाब क्या था जो मिरे सर में रहा

नज़ीर क़ैसर

कभी करना हो अंदाज़ा जब अपने दर्द का मुझ को

नज़ीर क़ैसर

जब वो साथ होता है

नज़ीर क़ैसर

चलते चलते मैं उस को घर ले आया

नज़ीर क़ैसर

बिखर के जाता कहाँ तक कि मैं तो ख़ुशबू था

नज़ीर क़ैसर

बरस रही थी बारिश बाहर

नज़ीर क़ैसर

बच्चे ने तितली पकड़ कर छोड़ दी

नज़ीर क़ैसर

अब के बार मैं तुझ से मिलने नहीं आया

नज़ीर क़ैसर

सब्र की रिश्वत माँग रही हैं

नज़ीर जालंधरी

ये करें और वो करें ऐसा करें वैसा करें

नज़ीर बनारसी

ये इनायतें ग़ज़ब की ये बला की मेहरबानी

नज़ीर बनारसी

वो आइना हूँ जो कभी कमरे में सजा था

नज़ीर बनारसी

उम्र भर की बात बिगड़ी इक ज़रा सी बात में

नज़ीर बनारसी

रास्ता रोके हुए कब से खड़ी है दुनिया

नज़ीर बनारसी

मिरी बे-ज़बान आँखों से गिरे हैं चंद क़तरे

नज़ीर बनारसी

जी में आता है कि दें पर्दे से पर्दे का जवाब

नज़ीर बनारसी

एक झोंका इस तरह ज़ंजीर-ए-दर खड़का गया

नज़ीर बनारसी

एक दीवाने को जो आए हैं समझाने कई

नज़ीर बनारसी

दूसरों से कब तलक हम प्यास का शिकवा करें

नज़ीर बनारसी

दिल की उजड़ी हुई हालत पे न जाए कोई

नज़ीर बनारसी

बद-गुमानी को बढ़ा कर तुम ने ये क्या कर दिया

नज़ीर बनारसी

अंधेरा माँगने आया था रौशनी की भीक

नज़ीर बनारसी

आस ही से दिल में पैदा ज़िंदगी होने लगी

नज़ीर बनारसी

ज़ख़्म कितने तिरी चाहत से मिले हैं मुझ को

नज़ीर बाक़री

ता उम्र फिर न होगी उजालों की आरज़ू

नज़ीर बाक़री