Couplets Poetry (page 228)

कितने आलम गुज़र गए मुझ पर

नील अहमद

किसी को याद करने के नहीं मख़्सूस कुछ लम्हे

नील अहमद

ख़ुद-फ़रेबी रहे तो अच्छा है

नील अहमद

जब जब तुम को याद करें हम

नील अहमद

हवा का रंग नहीं है मगर मिज़ाज तो है

नील अहमद

दिल की उदासियों का कोई सबब नहीं है

नील अहमद

और फिर मोहब्बत में जी के मर के देखा है

नील अहमद

अपनी आँखों को नोच डाला है

नील अहमद

अपनी आँखें नहीं जलाऊंगी

नील अहमद

सदा-बहार हो तुम और मेरी क़िस्मत हो

नाज़नीन बेगम नाज़

क़सम ख़ुदा की ये वारफ़्तगी न थी मुझ में

नाज़नीन बेगम नाज़

मिटा मिटा सा तसव्वुर है नाज़ माज़ी का

नाज़नीन बेगम नाज़

मिरी उम्र-ए-गुज़िश्ता की हक़ीक़त पूछने वालो

नाज़नीन बेगम नाज़

ख़ल्वत-ए-नाज़ में कुछ और ही रौनक़ होती

नाज़नीन बेगम नाज़

नसीब होंगी उसे कामयाबियाँ 'नजमी'

नज़्मी सिकंदराबादी

डरेंगे लोग वफ़ा के ख़याल से 'नज़मी'

नज़्मी सिकंदराबादी

यूँ मैं सीधा गया वहशत में बयाबाँ की तरफ़

नज़्म तबा-तबाई

ये दिल की बे-क़रारी ख़ाक हो कर भी न जाएगी

नज़्म तबा-तबाई

उड़ाई ख़ाक जिस सहरा में तेरे वास्ते मैं ने

नज़्म तबा-तबाई

उड़ के जाती है मिरी ख़ाक इधर गाह उधर

नज़्म तबा-तबाई

तू ने तो अपने दर से मुझ को उठा दिया है

नज़्म तबा-तबाई

सहर को उठते हैं वो देख कर कफ़-ए-रंगीं

नज़्म तबा-तबाई

रोज़-ए-सियह में साथ कोई दे तो जानिए

नज़्म तबा-तबाई

नज़र कहीं नहीं अब आते हज़रत-ए-नासेह

नज़्म तबा-तबाई

नशा में सूझती है मुझे दूर दूर की

नज़्म तबा-तबाई

मिरी बातों में क्या मालूम कब सोए वो कब जागे

नज़्म तबा-तबाई

लोटते रहते हैं मुझ पर चाहने वालों के दिल

नज़्म तबा-तबाई

किया है उस ने हर इक से विसाल का वादा

नज़्म तबा-तबाई

काबा ओ बुत-ख़ाना आरिफ़ की नज़र से देखिए

नज़्म तबा-तबाई

जो अहल-ए-दिल हैं अलग हैं वो अहल-ए-ज़ाहिर से

नज़्म तबा-तबाई