Couplets Poetry (page 226)

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा

निदा फ़ाज़ली

हर एक बात को चुप-चाप क्यूँ सुना जाए

निदा फ़ाज़ली

हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी

निदा फ़ाज़ली

हमारा 'मीर'-जी' से मुत्तफ़िक़ होना है ना-मुम्किन

निदा फ़ाज़ली

गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया

निदा फ़ाज़ली

घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें

निदा फ़ाज़ली

ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ दूर के साथी हैं

निदा फ़ाज़ली

ग़म है आवारा अकेले में भटक जाता है

निदा फ़ाज़ली

फ़ासला नज़रों का धोका भी तो हो सकता है

निदा फ़ाज़ली

एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक

निदा फ़ाज़ली

एक बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा चेहरा

निदा फ़ाज़ली

दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता

निदा फ़ाज़ली

दूर के चाँद को ढूँडो न किसी आँचल में

निदा फ़ाज़ली

दुनिया न जीत पाओ तो हारो न आप को

निदा फ़ाज़ली

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है

निदा फ़ाज़ली

दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती

निदा फ़ाज़ली

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो

निदा फ़ाज़ली

बृन्दाबन के कृष्ण कन्हैया अल्लाह हू

निदा फ़ाज़ली

बृन्दाबन के कृष्ण कन्हैय्या अल्लाह हू

निदा फ़ाज़ली

बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता

निदा फ़ाज़ली

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने

निदा फ़ाज़ली

बहुत मुश्किल है बंजारा-मिज़ाजी

निदा फ़ाज़ली

बाग़ में जाने के आदाब हुआ करते हैं

निदा फ़ाज़ली

बदला न अपने-आप को जो थे वही रहे

निदा फ़ाज़ली

बड़े बड़े ग़म खड़े हुए थे रस्ता रोके राहों में

निदा फ़ाज़ली

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो

निदा फ़ाज़ली

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं

निदा फ़ाज़ली

अपने लहजे की हिफ़ाज़त कीजिए

निदा फ़ाज़ली

अब किसी से भी शिकायत न रही

निदा फ़ाज़ली

अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला

निदा फ़ाज़ली